टी20 विश्व कप 2026 में ईसीबी ने खिलाड़ियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान रखा है: बेथ बैरेट-वाइल्ड


नई दिल्ली, 11 जून (आईएएनएस)। आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 की मेजबान इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) ने टूर्नामेंट को विश्वस्तरीय बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। टूर्नामेंट डायरेक्टर बेथ बैरेट-वाइल्ड ने कहा कि प्रतियोगिता के आयोजन ने न केवल क्रिकेट सुविधाओं के विकास को गति दी है, बल्कि खिलाड़ियों की सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स और ऑनलाइन दुर्व्यवहार जैसे अहम मुद्दों पर भी ध्यान दिया गया है।

बेथ बैरेट-वाइल्ड आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “12 जून से 5 जुलाई तक आयोजित होने वाले इस वैश्विक टूर्नामेंट के लिए इंग्लैंड के छह शहरों में सात प्रमुख वेन्यू तैयार किए गए हैं। इनमें ब्रिस्टल काउंटी ग्राउंड और साउथेम्प्टन के यूटिलिटा बाउल में बड़े स्तर पर बुनियादी ढांचे का विकास किया गया है। विश्व कप की मेजबानी किसी भी देश के लिए खेल सुविधाओं में निवेश का महत्वपूर्ण अवसर लेकर आती है और इस बार भी ऐसा ही देखने को मिला है।”

उन्होंने कहा, “ब्रिस्टल काउंटी ग्राउंड में चेंजिंग रूम और खिलाड़ियों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगभग 30 लाख पाउंड का निवेश किया गया है। इस परियोजना के तहत चार आधुनिक चेंजिंग सुविधाएं तैयार की गई हैं, जिससे एक ही दिन में कई मुकाबलों और डबल-हेडर मैचों का सफल आयोजन किया जा सकेगा। हाल के वर्षों में ‘द हंड्रेड’ टूर्नामेंट के दौरान डबल-हेडर मुकाबलों को मिली सफलता को देखते हुए यह निवेश काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।”

बेथ ने कहा, “साउथेम्प्टन स्थित यूटिलिटा बाउल में खिलाड़ियों और मैच अधिकारियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं को उन्नत किया गया है। टूर्नामेंट आयोजकों का मानना है कि महिला क्रिकेट के बढ़ते स्तर और लोकप्रियता को देखते हुए विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता बन गई है। महिला क्रिकेट के विस्तार का प्रभाव केवल विश्व कप वेन्यू तक सीमित नहीं है। लंकाशायर ने भी अपने ऐतिहासिक ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान में व्यापक सुधार किए हैं। विशेष रूप से महिला दर्शकों और खिलाड़ियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यहां महिला शौचालयों की संख्या 63 से बढ़ाकर 114 कर दी गई है। भविष्य में पुरुष और महिला दोनों वर्गों के क्रिकेट मुकाबले आयोजित किए जा सकेंगे।”

टूर्नामेंट निदेशक ने कहा, “हमारी तैयारी केवल मैदानों तक सीमित नहीं रही। आयोजकों को वैश्विक परिस्थितियों के कारण कई लॉजिस्टिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और उसके कारण अंतरराष्ट्रीय शिपिंग तथा यात्रा व्यवस्थाओं पर पड़े प्रभाव ने तैयारी को और जटिल बना दिया था। ईसीबी और आईसीसी ने शुरुआत से ही एक संयुक्त जोखिम प्रबंधन प्रणाली विकसित की थी। इसके तहत संभावित समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान के लिए वैकल्पिक योजनाएं तैयार की गई थीं। टीमों के किट और उपकरणों की शिपिंग में कुछ देरी जरूर हुई, लेकिन समय रहते सभी चुनौतियों का समाधान कर लिया गया।”

उन्होंने बताया कि भाग ले रही सभी 12 टीमें बिना किसी बड़ी परेशानी के इंग्लैंड पहुंच चुकी हैं। कुछ टीमों के लिए पहले से ब्रिटेन और आयरलैंड में द्विपक्षीय सीरीज खेलने के कारण यात्रा प्रबंधन अपेक्षाकृत आसान रहा। मजबूत बैकअप प्लान और निरंतर समन्वय के कारण संभावित संकटों को प्रभावी ढंग से संभाला जा सका।

बेथ ने कहा, “सुरक्षा व्यवस्था भी इस बार आयोजन का प्रमुख केंद्र रही है। ईसीबी और आईसीसी ने ब्रिटिश सरकार के साथ मिलकर विस्तृत सुरक्षा योजनाएं तैयार की हैं। संभावित ईंधन संकट, यात्रा संबंधी व्यवधान और अन्य आपात स्थितियों से निपटने के लिए विशेष प्रोटोकॉल बनाए गए हैं। महिला टी20 विश्व कप में सुरक्षा का स्तर किसी भी पुरुष वैश्विक क्रिकेट आयोजन के बराबर रखा गया है।”

महिला खेलों के सामने बढ़ती एक और बड़ी चुनौती ऑनलाइन दुर्व्यवहार है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खिलाड़ियों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। हाल ही में भारतीय बल्लेबाज भारती फुलमाली को उनके रूप-रंग को लेकर सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और नफरत भरी टिप्पणियों का सामना करना पड़ा था, जिसने इस मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया।

इस संबंध में उन्होंने कहा, “इस समस्या से निपटने के लिए इंग्लैंड महिला टीम विशेष मॉनिटरिंग सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रही है, जो खिलाड़ियों के खिलाफ होने वाले ऑनलाइन दुर्व्यवहार पर नजर रखता है और आवश्यक सहायता प्रदान करता है। आईसीसी भी टूर्नामेंट स्तर पर एआई आधारित ‘गो-बबल’ कार्यक्रम के जरिए सोशल मीडिया गतिविधियों की निगरानी कर रहा है। वर्ष 2024 में इस प्रणाली ने लगभग 15 लाख आपत्तिजनक और नफरत भरे ऑनलाइन संदेशों की पहचान और निगरानी की थी।”

बेथ बैरेट-वाइल्ड का मानना है कि महिला क्रिकेट की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके साथ नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। ऐसे में खिलाड़ियों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और सम्मानजनक खेल वातावरण सुनिश्चित करना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि मैदान पर उच्च स्तरीय क्रिकेट उपलब्ध कराना।

महिला टी20 विश्व कप 2026 केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि महिला क्रिकेट के बढ़ते प्रभाव, निवेश और पेशेवर विकास का प्रतीक बनकर उभर रहा है। आधुनिक सुविधाओं, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और खिलाड़ियों के संरक्षण पर केंद्रित पहल इस टूर्नामेंट को महिला क्रिकेट के इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव बना सकती हैं।

–आईएएनएस

पीएके


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