मुंबई, 7 जून (आईएएनएस)। इंसान अपनी जिंदगी में खुशी, दुख, प्यार, उम्मीद और निराशा जैसे एहसासों से हर दिन गुजरता है, लेकिन ये भावनाएं आखिर पैदा कहां से होती हैं और उन्हें नियंत्रित करने में शरीर के कौन-कौन से अंग भूमिका निभाते हैं? इसे लेकर मशहूर फिल्म निर्माता शेखर कपूर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया। अपनी इस पोस्ट में उन्होंने दिल और दिमाग के बीच के रिश्ते, प्यार की भावना और भावनात्मक समझ को लेकर कई दिलचस्प सवाल उठाए।
शेखर कपूर ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक तस्वीर साझा की और लिखा, ”कई बार लोग कहते हैं कि उनका दिल प्यार से भर गया है, उनका दिल खुशी से भर गया है, उनका दिल बैठ गया है या किसी ने उनका दिल तोड़ दिया है। ये केवल बोलचाल के शब्द नहीं हैं, बल्कि ऐसे अनुभव हैं, जिनसे लगभग हर व्यक्ति गुजरता है। अगर किसी इंसान ने कभी इन भावनाओं को महसूस नहीं किया, तो शायद उसने जिंदगी को पूरी तरह जिया ही नहीं है।”
शेखर कपूर ने अपनी पोस्ट में आगे पूछा, ”जब कोई व्यक्ति प्यार में पड़ता है तो क्या सबसे पहले उसका दिल तेजी से धड़कने लगता है और फिर दिमाग में डोपामाइन प्रतिक्रिया देता है? या फिर दिमाग दिल को संकेत देता है कि व्यक्ति प्यार में है और उसके बाद दिल की धड़कन तेज हो जाती है?”
फिल्म निर्माता ने आगे कहा, ”साइंस में ऐसी कई रिसर्च सामने आ रही हैं, जो यह संकेत देती हैं कि दिल और दिमाग का संबंध लोगों की सोच से कहीं ज्यादा गहरा है। शरीर में मौजूद वेगस नर्व के जरिए दिल से दिमाग तक बहुत सारे संदेश पहुंचते हैं। कई बार दिल दिमाग को उतने या उससे भी ज्यादा मैसेज भेजता है, जितने दिमाग दिल को भेजता है। इसलिए दिल को केवल ब्लड पंप करने वाला अंग मानना शायद सही नहीं होगा।”
शेखर कपूर के आगे कहा, ”दिल हमारे इमोशनल इंटेलिजेंस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। साइंस भविष्य में चाहे जो निष्कर्ष निकाले, लेकिन मेरा व्यक्तिगत अनुभव यही कहता है कि कई बार दिमाग किसी बात को समझने से पहले दिल उसे महसूस कर लेता है।”
शेखर कपूर की इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया जा रहा है।
अगर उनके प्रोफेशनल लाइफ की बात करें तो शेखर कपूर इन दिनों अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘मासूम: द न्यूज जेनरेशन’ पर काम कर रहे हैं। इसमें उनकी बेटी कावेरी तपूर भी नजर आएंगी।
–आईएएनएस
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