वाराणसी, 29 जुलाई (आईएएनएस)। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के वाराणसी में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा घाटों पर पहुंचे और आस्था की डुबकी लगाई। भक्तों ने गंगा स्नान के बाद पूजा-अर्चना, मंत्रोच्चारण और धार्मिक अनुष्ठान किए। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए घाटों पर जल पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें तैनात रहीं।
तीर्थ पुरोहित विवेकानंद पांडेय ने गुरु पूर्णिमा के महत्व को बताते हुए कहा कि आज आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा है, जिसे गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अज्ञान रूपी अंधकार से निकालकर ज्ञान और प्रकाश की ओर ले जाता है, उसे गुरु कहा जाता है। उन्होंने बताया कि इसी दिन ऋषि-मुनियों ने लोगों को ज्ञान का मार्ग दिखाया था, इसलिए इस पर्व का विशेष महत्व है।
उन्होंने कहा कि दूर-दूर से श्रद्धालु गुरु पूर्णिमा के अवसर पर काशी पहुंचते हैं। कई लोग अपने बच्चों को गंगा स्नान कराते हैं और भगवान से उनके उज्ज्वल भविष्य, शिक्षा और ज्ञान प्राप्ति की कामना करते हैं। श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन भी करते हैं और जीवन में सफलता व सद्बुद्धि की प्रार्थना करते हैं।
लखनऊ के गोमती नगर से वाराणसी पहुंचे श्रद्धालु महेश ने गुरु पूर्णिमा के महत्व पर कहा कि इस दिन का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। उन्होंने बताया कि मान्यता के अनुसार चातुर्मास के दौरान भगवान भोलेनाथ सृष्टि का भार संभालते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करने से मन को शांति मिलती है और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।
गोरखपुर निवासी श्रद्धालु अमर सिंह ने कहा कि गुरु पूर्णिमा का पर्व प्राचीन समय से ही विशेष महत्व रखता है। यह गुरु के सम्मान और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का दिन है। इस अवसर पर लोग स्नान-ध्यान करते हैं और अपने गुरु का स्मरण करते हैं।
वहीं, लखनऊ से आए श्रद्धालु दिनेश चन्द्रोजा ने बताया कि वह गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गंगा स्नान करने वाराणसी पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि घाटों पर स्नान का अनुभव बहुत अच्छा रहा और भीड़ कम होने के कारण आराम से पूजा-अर्चना करने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि गुरु मंत्र लेने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है, इसलिए वह हर वर्ष इस अवसर पर गंगा स्नान और गुरु वंदना के लिए आते हैं।
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