लखनऊ में बड़ा खुलासा : इमारत में फायर सेफ्टी इंतजाम थे न ही इमरजेंसी एग्जिट, एक ही रास्ते से होता था आवागमन

राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुई भीषण अग्निकांड की घटना में बड़ा खुलासा हुआ है। 15 लोगों की मौत के मामले में दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि जिस तीन मंजिला इमारत में आग लगी थी, वहां आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम, आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) और धुआं निकालने की कोई व्यवस्था नहीं थी। इसके बावजूद इमारत का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था। पुलिस ने मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी बनी हादसे की वजह

पुलिस के मुताबिक, अलीगंज थाने में दर्ज प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या), 110 (गैर-इरादतन हत्या की कोशिश), 125 (लापरवाही से जान को खतरे में डालना) और उत्तर प्रदेश अग्निशमन एवं आपात सेवा अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।एफआईआर में इमारत के मालिकों और वहां संचालित व्यवसायों के संचालकों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने सोमवार को राम कृष्ण उपाध्याय (43), वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (62), तुषार कृष्ण जायसवाल (31) और सुरेश कुमार साहू को गिरफ्तार किया था। इनमें उपाध्याय, शुक्ला और जायसवाल इमारत के संयुक्त मालिक बताए गए हैं।

एक ही रास्ते से होता था आवागमन

जांच में सामने आया है कि सेक्टर-डी स्थित इस तीन मंजिला भवन के भूतल और पहली मंजिल पर पालतू जानवरों की देखभाल से जुड़ा क्लिनिक व दुकान संचालित थी। दूसरी मंजिल पर वीडियो गेमिंग जोन और 3डी एनिमेशन सेंटर जबकि तीसरी मंजिल पर आईटी नेटवर्किंग कार्यालय चल रहा था।

Related Articles

Latest News