मुंबई, 18 मई (केसरिया न्यूज़)। सेबी यानी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (एसईबीआई) के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित साइबर सुरक्षा खतरे भारत के वित्तीय बाजारों के सामने सबसे बड़े जोखिमों में से एक बनकर उभर रहे हैं। उन्होंने बाजार व्यवस्था में इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर सिस्टम की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आक्रामक कदम उठाने की जरूरत बताई।
एनडीटीवी प्रॉफिट के साथ बातचीत के दौरान सेबी प्रमुख ने कहा कि फिलहाल एआई टूल्स को लेकर सबसे बड़ी चिंता बाजार में हेरफेर या एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग नहीं, बल्कि साइबर सुरक्षा कमजोरियों को लेकर है।
पांडे ने कहा कि वित्तीय बाजार बड़े पैमाने पर सॉफ्टवेयर सिस्टम पर निर्भर हैं और यदि साइबर सुरक्षा ढांचे में कोई कमजोरी रह जाती है तो उसका गलत इस्तेमाल बाजार की विश्वसनीयता के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। उन्होंने कहा, “हाल के समय में एआई टूल्स को लेकर ज्यादातर चिंताएं साइबर सुरक्षा से जुड़ी हैं। जैसा कि आप जानते हैं, बाजार काफी हद तक सॉफ्टवेयर सिस्टम पर निर्भर करते हैं। अगर साइबर सुरक्षा कमजोर पड़ती है या सॉफ्टवेयर में खामियां मिलती हैं, तो साइबर हमलों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे हमले सफल होने पर बाजार की विश्वसनीयता को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।”
उन्होंने वित्तीय बाजारों में इस्तेमाल होने वाले सभी सॉफ्टवेयर, खासकर थर्ड-पार्टी वेंडर्स द्वारा उपलब्ध कराए गए सिस्टम के लिए मजबूत सुरक्षा उपायों की जरूरत पर जोर दिया।
पांडे ने कहा, “नियामकों और बाजार से जुड़े सभी पक्षों को मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, आक्रामक पैच मैनेजमेंट और लगातार कमजोरियों की जांच सुनिश्चित करनी होगी।”
उन्होंने आगे कहा, “हमें पहले से ही यह सुनिश्चित करना होगा कि जिन भी सॉफ्टवेयर सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है, वे पूरी तरह सुरक्षित हों। इसके लिए कमजोरियों की पहचान करने वाले पारंपरिक सुरक्षा टूल्स का व्यापक इस्तेमाल और समय-समय पर सुरक्षा अपडेट बेहद जरूरी हैं।”
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब दुनिया भर में तेजी से विकसित हो रहे एआई सिस्टम को लेकर चिंता बढ़ रही है। माना जा रहा है कि ये सिस्टम सॉफ्टवेयर की कमजोरियों का फायदा उठाने में सक्षम होते जा रहे हैं।
हाल ही में एंथ्रोपिक के मिथोस एआई मॉडल को लेकर भी नियामकीय स्तर पर चिंता बढ़ी है, जो कथित तौर पर प्रमुख ऑपरेटिंग सिस्टम और इंटरनेट ब्राउजर्स में मौजूद कमजोरियों की खुद पहचान कर उनका फायदा उठाने में सक्षम है।
इससे पहले केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी मिथोस एआई से जुड़े संभावित खतरों को लेकर चिंता जाहिर की थी।
–केसरिया न्यूज़
