कृषि से होगा विकसित भारत का निर्माण: राज्यपाल सैयद अता हसनैन


भागलपुर, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने शुक्रवार को कहा कि कृषि से ही विकसित भारत का निर्माण संभव है। उन्होंने ‘वर्क इज वर्शिप’ को आदर्श मंत्र बताते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र से जुड़े विद्यार्थी और वैज्ञानिक देश की खाद्य सुरक्षा के संरक्षक हैं और यही मजबूती भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में सहायक होगी।

राज्यपाल बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर के नौवें दीक्षांत समारोह में शामिल हुए। इस क्रम में उन्होंने छात्र-छात्राओं को शपथ दिलाई और उन्हें राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संदेश दिया। इससे पूर्व स्विमिंग पूल का उद्घाटन किया गया तथा प्रकृति संरक्षण का संदेश देते हुए रुद्राक्ष के पौधे का पौधारोपण किया गया। इस मौके पर कुल 443 छात्र-छात्राओं को विभिन्न पाठ्यक्रमों में स्नातक, स्नातकोत्तर एवं पीएचडी की उपाधियां प्रदान की गईं, जिनमें 13 विद्यार्थियों को पीएचडी की डिग्री दी गई।

कार्यक्रम में पीएचडी एग्रीकल्चर, एमएससी एग्रीकल्चर, एमएससी हॉर्टिकल्चर, बीएससी एग्रीकल्चर, बीएससी हॉर्टिकल्चर, बी.टेक इन एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग तथा एमबीए इन एग्रीबिजनेस मैनेजमेंट सहित विभिन्न डिग्रियाँ प्रदान की गईं। साथ ही छह मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया गया। बिहार के राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि सबौर में उत्कृष्ट अवसंरचना का विकास हो रहा है।

उन्होंने कार्यक्रम की गुणवत्ता, अनुशासन एवं प्रस्तुति को भारतीय सेना के स्तर के अनुरूप बताते हुए विशेष प्रशंसा की। उन्होंने समारोह के उच्च स्तर और उत्कृष्ट आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने विशेष रूप से मखाना क्षेत्र में विश्वविद्यालय के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय में ‘मखाना उत्कृष्टता केंद्र’ की स्थापना अत्यंत आवश्यक और समयानुकूल पहल है। इस दिशा में उन्होंने अपनी सहमति प्रदान की और आश्वस्त किया कि इस केंद्र की स्थापना एवं सुदृढ़ीकरण के लिए आवश्यक सहयोग दिया जाएगा, जिससे बिहार में मखाना अनुसंधान, उत्पादन एवं प्रसंस्करण को नई दिशा मिल सके।

भागलपुर के सांसद अजय कुमार मंडल ने कहा कि यह दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्राप्त करने का दिन नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के वर्षों के कठिन परिश्रम, अनुशासन और समर्पण का उत्सव है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज एवं राष्ट्र के विकास में करने का आह्वान किया।

बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों, चल रही परियोजनाओं तथा भविष्य की कार्ययोजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ‘वर्क इज वर्शिप’ एवं ‘वर्क विद स्माइल’ के सिद्धांत पर कार्य करते हुए निरंतर प्रगति कर रहा है। उन्होंने ‘एक वैज्ञानिक–एक उत्पाद’, जीआई उत्पाद, पलमायरा पाउडर, सिंदूर, ब्लूबेरी एवं ब्लैकबेरी जैसे नवाचारों की जानकारी दी।

–आईएएनएस

एमएनपी/डीएससी


Related Articles

Latest News