असम में फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई तेज, अब तक 62 गिरफ्तार: सीएम हिमंता बिस्वा सरमा


गुवाहाटी, 26 जून (आईएएनएस)। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार ने फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि सरकार समाज से हर तरह की गैरकानूनी गतिविधियों को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा, “हम समाज से हर तरह की बुराई को खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। नशा तस्करों और बाल विवाह के खिलाफ व्यापक कार्रवाई के बाद अब हम फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ अभियान चला रहे हैं, ताकि स्वास्थ्य व्यवस्था की विश्वसनीयता बनी रहे और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।”

मुख्यमंत्री ने राज्य पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की ओर से फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की जानकारी साझा की।

मुख्यमंत्री के अनुसार, वर्ष 2025 से अब तक राज्यभर में कथित फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ 59 मामले दर्ज किए गए हैं।

इस अभियान के दौरान अब तक 62 फर्जी डॉक्टरों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सरकार बिना वैध डिग्री या लाइसेंस के खुद को डॉक्टर बताकर इलाज करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है।

सरकार का कहना है कि ऐसे लोग मरीजों का अवैध और असुरक्षित इलाज कर उनकी जान को खतरे में डालते हैं। फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ यह कार्रवाई राज्य सरकार द्वारा पिछले कुछ वर्षों में चलाए जा रहे व्यापक कानून-व्यवस्था अभियानों का हिस्सा है।

इससे पहले राज्य सरकार नशा तस्करी, अवैध मादक पदार्थों के कारोबार और बाल विवाह के खिलाफ भी बड़े स्तर पर अभियान चला चुकी है। मुख्यमंत्री कई बार कह चुके हैं कि जनता की सुरक्षा और कानून का राज बनाए रखने के लिए सख्त कार्रवाई जरूरी है।

अधिकारियों ने कहा कि असम में फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। बिना मान्यता प्राप्त योग्यता या लाइसेंस के इलाज करते पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

सरकार ने लोगों से भी अपील की है कि वे केवल पंजीकृत डॉक्टरों से ही इलाज कराएं और यदि किसी फर्जी डॉक्टर की जानकारी मिले तो उसकी सूचना तुरंत प्रशासन को दें। सरकार का कहना है कि जनता के सहयोग से ही फर्जी इलाज पर रोक लगाई जा सकती है और राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को सुरक्षित रखा जा सकता है।

–आईएएनएस

एएमटी/वीसी


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