नई दिल्ली, 14 जून (आईएएनएस)। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, कैम्ब्रिज और यूके पार्लियामेंट के मंचों से भारतीय दर्शन और वेदांत की शिक्षाओं को वैश्विक विमर्श के केंद्र में रखने के बाद दार्शनिक आचार्य प्रशांत रविवार को स्वदेश लौटे। दिल्ली हवाई अड्डे पर देशभर से उमड़े सैकड़ों शिष्यों और श्रोताओं ने हाथों में तख्तियां लेकर उनका अभिनंदन किया। तख्तियों पर उनके स्वागत के साथ-साथ ऑक्सफोर्ड, कैम्ब्रिज और यूके पार्लियामेंट में दिए गए संबोधनों की सराहना के संदेश अंकित थे। बच्चे तिरंगे लहराते हुए दौड़कर उनके पास पहुंचे।
आचार्य प्रशांत का यह यूके दौरा भारतीय दर्शन की वैश्विक प्रासंगिकता के प्रमाण के रूप में सामने आया है। कैम्ब्रिज यूनियन में आयोजित कैम्ब्रिज इंडिया बिज़नेस डायलॉग 2026 के कार्यक्रम में कनिश्क नारायण सांसद, लॉर्ड करण बिलिमोरिया (बैरन बिलिमोरिया ऑफ चेल्सी) और यूके में भारत के उच्चायुक्त महामहिम पेरियासामी कुमारन उपस्थित थे। 12 जून को हाउस ऑफ लॉर्ड्स में ‘इंडियन रूट्स, ग्लोबल विंग्स’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उन्होंने संबोधन दिया, जहां लॉर्ड बिलिमोरिया, लॉर्ड नागराजू (बैरन नागराजू ऑफ ब्लूम्सबरी), ब्रेंट वेस्ट से लेबर सांसद बैरी गार्डिनर, भारत के डिप्टी हाई कमिश्नर कार्तिक पांडे और आईएनएसए के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित तिवारी सहित ब्रिटेन के प्रमुख नीति-निर्माता उपस्थित थे। वेस्टमिंस्टर पैलेस का यह मंच नेल्सन मंडेला, बराक ओबामा और बिल क्लिंटन जैसी विभूतियों के ऐतिहासिक संबोधनों का साक्षी रहा है। ऑक्सफोर्ड के मैनर रोड बिल्डिंग में उन्होंने ईशावास्य उपनिषद पर व्याख्यान दिया।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, “दुनिया को भारत से सबसे अधिक आवश्यकता उसके आध्यात्मिक और दार्शनिक ज्ञान की है, न कि केवल सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों की।” तीनों मंचों पर एक ही संदेश देने के विषय में उन्होंने कहा, “सत्य कोई ऐसा उत्पाद नहीं है जिसे मैं अलग-अलग बाज़ारों के लिए अलग ढंग से तैयार कर सकूं।” विदेश में वेदांत की स्वीकार्यता और भारत में उसकी उपेक्षा के विरोधाभास पर उन्होंने कहा कि अहंकार परंपरा के उन हिस्सों को सहज स्वीकार करता है जो मनोरंजन, सामाजिक पहचान या सुविधा से जुड़े हों, जबकि आत्म-जिज्ञासा और उपनिषद को सम्मान के नाम पर किनारे कर दिया जाता है।
जलवायु परिवर्तन पर उनका स्वर पश्चिमी नीति-विमर्श से मौलिक रूप से भिन्न रहा है। संसद परिसर में श्रोताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “जलवायु संकट मनुष्य की आंतरिक व्यवस्था की समस्या है, और संसद के सदस्यों को इसे स्वीकार करना होगा। यह उत्सर्जन की समस्या नहीं है, यह मानव अहंकार की समस्या है।” कैम्ब्रिज में उन्होंने रेखांकित किया था कि “बाहर से हम इतिहास के किसी भी काल की तुलना में अधिक समृद्ध और शक्तिशाली हैं, भीतर से हम अभी भी गुफा-मानव हैं।” लंदन लौटने पर वे 20 से 28 जून के बीच आयोजित लंदन क्लाइमेट एक्शन वीक में संबोधन देंगे, जो यूरोप का सबसे बड़ा स्वतंत्र जलवायु परिवर्तन से संबंधित आयोजन है।
हवाई अड्डे पर उपस्थित श्रोताओं की ओर इशारा करते हुए उन्होंने बताया कि देशभर से लोग एनसीआर में आगामी शिविर के लिए एकत्र हो रहे हैं और उनके प्रेम को अनदेखा करना संभव नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया, “लोगों का प्रेम और समर्पण मेरे लिए व्यक्तिगत नहीं, बल्कि बोध और धर्म के प्रति उनकी निष्ठा का विषय है।” शिविर के पश्चात वे पुनः लंदन रवाना होंगे, जहां लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स और किंग्स कॉलेज लंदन सहित अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में उनके संबोधन निर्धारित हैं।
हवाई अड्डे पर उपस्थित श्रोताओं ने वेदांत की एक दार्शनिक आवाज़ को उन वैश्विक मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व करते देखकर गर्व व्यक्त किया जो ऐतिहासिक रूप से पश्चिमी बौद्धिक और राजनीतिक विमर्श के केंद्र रहे हैं।
आईआईटी दिल्ली और आईआईएम अहमदाबाद के पूर्व छात्र और प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक आचार्य प्रशांत, गीता मिशन के माध्यम से 100 से अधिक देशों में जन-स्तर पर आत्मबोध की शिक्षा का कार्य कर रहे हैं। यूके के जाने-माने वॉटकिन्स माइंड बॉडी स्पिरिट 2026 सूची में उन्हें 20वां स्थान प्राप्त हुआ है, जो इस सूची में किसी नई प्रविष्टि के लिए सर्वाधिक उच्च स्थानों में से एक है। पुस्तकों, देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में सत्रों और करोड़ों तक पहुंचती बहुभाषी डिजिटल उपस्थिति के माध्यम से वे उन विरल भारतीय दार्शनिकों में हैं जिन्होंने भारतीय दर्शन को वैश्विक मंच पर सांस्कृतिक धरोहर के रूप में नहीं, बल्कि सक्रिय दर्शन के रूप में प्रस्तुत किया है।
–आईएएनएस
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