नई दिल्ली, 8 जून (केसरिया न्यूज़)। केंद्र सरकार ने सोमवार को कहा कि पिछले 12 वर्षों में कल्याणकारी योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा उपायों के विस्तार के कारण देश में करीब 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकलने में सफल हुए हैं।
सरकार ने नल से जल, खुले में शौच से मुक्ति, स्वास्थ्य सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और प्राथमिक शिक्षा में लड़कियों के नामांकन जैसे क्षेत्रों में हुई प्रगति को इस उपलब्धि का प्रमुख आधार बताया है।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, अगस्त 2019 में ग्रामीण भारत के 3.23 करोड़ घरों तक ही नल के माध्यम से पानी पहुंचता था, जो मई 2026 तक बढ़कर 15.84 करोड़ घरों तक पहुंच गया।
‘हर घर जल’ अभियान के तहत अब तक 2.77 लाख गांवों में 100 प्रतिशत नल जल कवरेज हासिल की जा चुकी है। इसके साथ ही देश में घरेलू नल जल कवरेज बढ़कर 81.87 प्रतिशत हो गई है।
सरकार ने बताया कि पिछले वर्षों में 12.11 करोड़ से अधिक घरेलू शौचालयों का निर्माण किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता कवरेज 2014 के 39 प्रतिशत से बढ़कर लगभग सार्वभौमिक स्तर तक पहुंच गई है।
सरकार ने कहा कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 10.57 करोड़ से अधिक मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिए गए हैं, जिससे महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार हुआ है और घरों के अंदर होने वाले धुएं और प्रदूषण में कमी आई है।
बयान के अनुसार, देश में बहुआयामी गरीबी की दर 2013-14 में 29.17 प्रतिशत थी, जो 2022-23 में घटकर 11.28 प्रतिशत रह गई। इस तरह इस अवधि में गरीबी दर में 17.89 प्रतिशत अंक की उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। सरकार के अनुसार, 2004 से 2014 के बीच औसत महंगाई दर 8.1 प्रतिशत थी, जो 2014 से 2025 के दौरान घटकर 5.1 प्रतिशत रह गई। इससे परिवारों की क्रय शक्ति (परचेजिंग पावर) में सुधार हुआ है।
2019 में शुरू किए गए जल जीवन मिशन (जेजेएम) ने ग्रामीण आबादी के स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक-आर्थिक स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार लाने में मदद की है।
इस योजना के लिए 2020-21 से 2026-27 के बीच बजटीय आवंटन में लगभग 488 प्रतिशत की वृद्धि की गई है, जो बढ़कर 67,670 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।
स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में सरकार ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच मिली है।
वहीं, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के तहत 81 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया गया है। सरकार के अनुसार, प्राथमिक स्तर पर लड़कियों के स्कूल छोड़ने की दर 2013-14 में 4.6 प्रतिशत थी, जो 2024-25 में घटकर केवल 0.3 प्रतिशत रह गई है।
इसके अलावा, आधार-आधारित राशन वितरण जैसी डिजिटल गवर्नेंस पहलों से सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुंचा है।
सरकार ने यह भी बताया कि आकांक्षी जिलों और जनजातीय क्षेत्रों में पानी, स्वच्छता और आजीविका से जुड़ी लक्षित योजनाओं के माध्यम से कल्याणकारी सेवाओं का विस्तार किया गया है।
बयान में कहा गया कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान का उद्देश्य घटते बाल लिंगानुपात और लिंग-आधारित भेदभाव को रोकना था। इसके परिणामस्वरूप लिंगानुपात 2011 की जनगणना में 943 से बढ़कर 2021 में प्रति 1,000 पुरुषों पर 1,020 महिलाओं तक पहुंच गया।
साथ ही, माध्यमिक विद्यालयों में लड़कियों का नामांकन 2014-15 के 75.51 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 80.2 प्रतिशत हो गया है।
–केसरिया न्यूज़
