चेन्नई, 2 अगस्त (आईएएनएस)। डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने कावेरी जल विवाद, प्रस्तावित मेकेदातु बांध, नीट और कथित राजनीतिक खरीद-फरोख्त को लेकर अपनी राय रखी है। उन्होंने तमिलनाडु से जुड़े मुद्दों पर चुप रहने वाले नेताओं पर राज्य के हितों के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया है।
डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि जो नेता पद और सत्ता के बदले अपने सिद्धांतों से समझौता कर लेते हैं, वे ऐसे जहरीले सांप हैं जो पदों के लिए अपनी वफादारी बेच देते हैं।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब तमिलनाडु में कावेरी मुद्दे को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है और प्रतिद्वंद्वी दल एक-दूसरे पर विश्वासघात के आरोप लगा रहे हैं।
मारन ने कहा कि जो राजनीतिक नेता तमिलनाडु आते हैं लेकिन कावेरी जल विवाद पर राज्य के अधिकारों के बारे में कुछ नहीं बोलते, उनकी तमिलनाडु के प्रतिबद्धता पर सवाल उठाया जाना चाहिए।
उन्होंने उन लोगों को भी निशाने पर लिया जो कर्नाटक की प्रस्तावित मेकेदातु जलाशय परियोजना का विरोध नहीं करते। उनका तर्क था कि तमिलनाडु के कावेरी जल अधिकारों की रक्षा के लिए इस परियोजना का विरोध करना आवश्यक है।
नीट के मुद्दे पर डीएमके सांसद ने कहा कि केवल परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को उजागर करना पर्याप्त नहीं है। दल तमिलनाडु का प्रतिनिधित्व करने का दावा करते हैं, उन्हें स्पष्ट रूप से नीट व्यवस्था को समाप्त करने की मांग करनी चाहिए क्योंकि यह राज्य में लंबे समय से एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है।
दयानिधि मारन ने तमिलनाडु की राजनीति में कथित खरीद-फरोख्त के आरोपों का भी जिक्र किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक आवाजें भाजपा पर विधायकों की कथित खरीद-फरोख्त के प्रयासों की आलोचना तो करती हैं लेकिन तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) से जुड़े ऐसे ही आरोपों पर चुप रहती हैं। उनके अनुसार, इस तरह का चयनात्मक विरोध राजनीतिक पाखंड है।
डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने कहा कि ऐसी कार्रवाइयों पर चुप रहना भी एक तरह का विश्वासघात है। मारन ने नीट के खिलाफ हुए प्रदर्शनों से निपटने के तरीके की भी आलोचना की और प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस और तमिलनाडु पुलिस द्वारा नीट विरोधी प्रदर्शनकारियों के साथ किए गए व्यवहार की निंदा न करना नेताओं के रुख में असंगति को उजागर करता है।
उन्होंने कहा, “क्या गजब का विश्वासघात!” और इस टिप्पणी के जरिए तमिलनाडु की समकालीन राजनीति में मौजूद विरोधाभासों और चयनात्मक आक्रोश को रेखांकित किया।
–आईएएनएस
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