सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच के अनुरोध वाली याचिका पर त्वरित सुनवाई से सोमवार को इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायाधीश शील नागू की पीठ ने कहा कि इस मामले को ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।
इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के अनुरोध वाली याचिका में केंद्र, उत्तर प्रदेश सरकार और मंदिर ट्रस्ट को सार्वजनिक हित की रक्षा करने तथा करोड़ों भक्तों व दानदाताओं का विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक नियामक, पर्यवेक्षी और ऑडिट तंत्र का गठन व संचालन करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है।
याचिका में कहा गया, ”श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े धन के कथित गबन और अन्य कथित अनियमितताओं की खबरें सही साबित हों या नहीं, लेकिन इन खबरों ने उन पीढ़ियों के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है, जिन्होंने अयोध्या की गौरवपूर्ण विरासत की पुनर्स्थापना के लिए लंबा संघर्ष किया है।”
इसमें आरोप लगाया गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने बिना किसी प्राथमिकी या नियमित आपराधिक मामला दर्ज किए इस मामले की जांच शुरू कर दी है। याचिका में कहा गया है कि मंदिर ट्रस्ट से कथित रूप से धन गायब होने और अन्य कथित वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित रिपोर्टों की सत्यता की स्वतंत्र रूप से जांच की जानी चाहिए।
