फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ की 18वीं पुण्यतिथि पर तीनों सेनाओं ने दी श्रद्धांजलि, सैन्य विरासत को किया नमन


चेन्नई, 27 जून (आईएएनएस)। भारतीय सशस्त्र बलों ने शनिवार को देश के पहले फील्ड मार्शल सैम होर्मुसजी फ्रामजी जमशेदजी मानेकशॉ की 18वीं पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उदगमंडलम (ऊटी) स्थित पारसी जोरोस्ट्रियन कब्रिस्तान में आयोजित समारोह में थल सेना, नौसेना और वायु सेना के प्रतिनिधियों ने देश के महान सैन्य नायक को नमन करते हुए उनकी वीरता, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रसेवा को याद किया।

मद्रास रेजिमेंटल सेंटर (एमआरसी) और डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज (डीएसएससी) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस श्रद्धांजलि समारोह में सैन्य अधिकारियों, पूर्व सैनिकों, स्थानीय नागरिकों और पारसी समुदाय के सदस्यों ने भाग लिया। समारोह के दौरान फील्ड मार्शल मानेकशॉ के प्रति भारतीय सशस्त्र बलों की गहरी श्रद्धा और सम्मान देखने को मिला।

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना प्रमुखों की ओर से पुष्पचक्र अर्पित किए गए। यह श्रद्धांजलि देश की ओर से उस महान सैन्य नेतृत्व के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक थी, जिसने भारतीय सेना को अनेक ऐतिहासिक उपलब्धियां दिलाईं।

इस अवसर पर डीएसएससी के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल मनीष मोहन एरी, 8 गोरखा राइफल्स रेजिमेंट के कर्नल मेजर जनरल कार्तिक सी. शेषाद्री और वेलिंगटन के स्टेशन कमांडर एवं मद्रास रेजिमेंटल सेंटर के कमांडेंट ब्रिगेडियर कृष्णेंदु दास सहित कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने फील्ड मार्शल मानेकशॉ के चित्र और समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए।

पूरे समारोह का आयोजन सैन्य परंपराओं और गरिमा के अनुरूप किया गया। मद्रास रेजिमेंट के जवानों ने ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ प्रस्तुत किया, जबकि बिगुल वादकों ने ‘लास्ट पोस्ट’ की धुन बजाई। इसके बाद दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत फील्ड मार्शल को श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने उनके अद्वितीय योगदान को याद करते हुए उन्हें भारतीय सैन्य इतिहास की अमूल्य धरोहर बताया।

‘सैम बहादुर’ के नाम से प्रसिद्ध फील्ड मार्शल मानेकशॉ ने वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारतीय सेना का नेतृत्व किया था। उनके रणनीतिक नेतृत्व में भारत ने ऐतिहासिक विजय हासिल की, जिसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश का गठन हुआ और 93 हजार से अधिक पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया। इस असाधारण सैन्य सफलता के बाद उन्हें जनवरी 1973 में भारत के पहले फील्ड मार्शल की उपाधि से सम्मानित किया गया।

करीब चार दशक तक देश की सेवा करने के बाद मानेकशॉ ने तमिलनाडु के कुन्नूर को अपना निवास बनाया। 27 जून 2008 को उनके निधन के बाद से ऊटी स्थित उनकी समाधि भारतीय सैनिकों और देशवासियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनी हुई है। भारतीय सशस्त्र बलों ने एक बार फिर उनकी विरासत को आगे बढ़ाने और उनके आदर्शों का पालन करने का संकल्प दोहराया।

–आईएएनएस

एससीएच/एबीएम


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