नई दिल्ली, 23 जून (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने एचआईवी और एड्स को लेकर उच्चस्तरीय बैठक में भारत का पक्ष रखा। भारत ने 2030 तक एड्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा मानने के अपने नए वादे को दोहराया। उन्होंने नेशनल एड्स और एसटीडी कंट्रोल प्रोग्राम को लागू करके इस लक्ष्य की ओर भारत की कोशिशों के बारे में जानकारी दी।
इस दौरान सस्ती दवाओं, डायग्नोस्टिक्स और नई तकनीक तक सबके लिए बराबर पहुंच के महत्व पर जोर दिया गया। साथ ही, जीवन बचाने वाली दवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए टीआरआईपीएस समझौते के तहत फ्लेक्सिबिलिटी पर भी जोर दिया गया।
भारत का पक्ष रखते हुए पी हरीश ने कहा, “भारत ड्राफ्ट पॉलिटिकल डिक्लेरेशन में दिखाई देने वाली वैश्विक एकजुटता की भावना के साथ खुद को जोड़ता है और आगे की सोच वाले और कार्रवाई पर आधारित नतीजे पर आम सहमति बनाने के लिए की गई कोशिशों का स्वागत करता है। जैसे-जैसे हम 2030 की डेडलाइन के करीब पहुंच रहे हैं, ग्लोबल एचआईवी से निपटने का तरीका एक अहम मोड़ पर है। हालांकि पिछले दो दशकों में काफी तरक्की हुई है लेकिन लगातार असमानताएं, पैसे की कमी और उभरती वैश्विक चुनौतियां इन कामयाबियों के लिए खतरा बनी हुई हैं। इसलिए हम 2030 तक एड्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा मानने और उसके बाद भी तरक्की बनाए रखने के डिक्लेरेशन के नए कमिटमेंट का समर्थन करते हैं।”
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर, भारत नेशनल एड्स और एसटीडी कंट्रोल प्रोग्राम को लागू करके इस लक्ष्य के लिए पूरी तरह से कमिटेड है, जो सबूतों पर आधारित प्लानिंग, कम्युनिटी एंगेजमेंट और इंटीग्रेटेड सर्विस डिलीवरी से गाइडेड है। लगातार घरेलू निवेश के जरिए, भारत ने नए एचआईवी संक्रमण और एड्स से जुड़ी मौतों को कम करने में काफी तरक्की की है, साथ ही रोकथाम, टेस्टिंग, इलाज, देखभाल और सपोर्ट सर्विस तक पहुंच बढ़ाई है।
भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि भारत विशेष रूप से देश-नेतृत्व वाली रणनीतियों, टिकाऊ वित्तपोषण और एचआईवी सेवाओं को व्यापक स्वास्थ्य प्रणालियों तथा सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (यूएचसी) ढांचे के साथ एकीकृत करने पर दिए गए जोर का स्वागत करता है।
उन्होंने कहा कि भारत का मानना है कि दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एचआईवी से निपटने के प्रयासों का नेतृत्व संबंधित देशों के हाथ में होना चाहिए, उन्हें स्थानीय महामारी संबंधी परिस्थितियों के अनुरूप होना चाहिए और उनके लिए पूर्वानुमेय वित्तीय सहायता तथा मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली का समर्थन उपलब्ध होना चाहिए।
पी हरीश ने कहा, “भारत एचआईवी और सिफलिस के वर्टिकल ट्रांसमिशन को खत्म करने को बहुत महत्व देता है। हमने गर्भवती महिलाओं में एचआईवी, सिफलिस और हेपेटाइटिस बी के लिए एक ट्रिपल एलिमिनेशन स्ट्रैटेजी शुरू की है, जो यूनिवर्सल एंटीनेटल स्क्रीनिंग, समय पर इलाज से जुड़ने और संक्रमित बच्चों के फॉलो-अप पर आधारित है। इसलिए हम बच्चों में एड्स को खत्म करने और वर्टिकल ट्रांसमिशन को खत्म करने में तेजी लाने के डिक्लेरेशन के कमिटमेंट का स्वागत करते हैं।”
उन्होंने कहा कि हम एचआईवी, ट्यूबरकुलोसिस, वायरल हेपेटाइटिस और दूसरे सह-संक्रमण के लिए एकीकृत प्रतिक्रिया को मजबूत करने पर जोर देने का भी सपोर्ट करते हैं, यह मानते हुए कि ऐसे तरीकों से स्वास्थ्य के नतीजे बेहतर होते हैं और कार्यक्रम की दक्षता बढ़ती है।
यूएन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने कहा कि भारत सस्ती दवाओं, डायग्नोस्टिक्स और नई तकनीक तक सबके लिए बराबर पहुंच के महत्व पर भी जोर देता है। डब्ल्यूटीओ टीआरआईपीएस समझौते के तहत उपलब्ध फ्लेक्सिबिलिटी का इस्तेमाल, खासकर डेवलपिंग देशों के लिए, जीवन बचाने वाले स्वास्थ्य उत्पादों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए बहुत जरूरी है।
–आईएएनएस
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