एक नकली दुल्हन, शादीशुदा दूल्हा जो कुंवारा बनकर आया और सवाल पूछते ही गायब हुई बारात- कन्नौज का यह मामला सरकारी मदद में धोखाधड़ी की आसानी से एक और नजीर बन सकता था, लेकिन इसके उलट यह घटना इस बात का सबूत बन गई कि प्रौद्योगिकी उत्तर प्रदेश में सरकारी लाभ पहुंचाने की व्यवस्था को कैसे बदल रही है। उत्तर प्रदेश की ‘मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना’ आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों की शादी में मदद करने वाली प्रमुख कल्याणकारी योजना है और इसके क्रियान्वयन में प्रौद्योगिकी की मदद से बड़ा डिजिटल बदलाव किया जा रहा है।
ऑनलाइन आवेदन, आधार-आधारित पहचान सत्यापन, आय प्रमाणपत्रों की डिजिटल जांच और अलग-अलग डेटाबेस से मिलान अब धोखाधड़ी रोकने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में समाज कल्याण विभाग ने लाभ देने से पहले ही 42,781 ”अपात्र” आवेदकों की पहचान कर उन्हें योजना से हटा दिया। चूंकि हर जोड़े को एक लाख रुपये की मदद मिलती है, ऐसे में इस प्रक्रिया से सरकारी खजाने से 427.81 करोड़ रुपये का गलत भुगतान होने से बचा।
कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े अधिकारियों के लिए यह आंकड़ा इस बात का सबसे मजबूत संकेत बनकर उभर रहा है कि प्रौद्योगिकी कैसे शासन को बेहतर बना सकती है। समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सोच पर आधारित एक कल्याणकारी पहल है। यह वास्तव में जरूरतमंद परिवारों के लिए है। पहले कभी-कभी गड़बड़ियों की खबरें आती थीं लेकिन प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से हम धोखाधड़ी को प्रभावी ढंग से रोक पाए हैं। इससे योजना अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनी है।”
उन्होंने कहा, ”अगर आप हिसाब लगाएं, तो सरकार इस योजना के तहत हर पात्र जोड़े को एक लाख रुपये देती है। पिछले साल 42,781 अपात्र आवेदकों को हटाकर हमने 427.81 करोड़ रुपये व्यर्थ खर्च होने से बचाए।” कन्नौज की घटना नयी व्यवस्था की ताकत दिखाती है। अधिकारियों के अनुसार, एक शादीशुदा व्यक्ति ने सामूहिक विवाह कार्यक्रम में नकली दुल्हन पेश कर लाभ लेने की कोशिश की। तकनीकी जांच और रिकॉर्ड मिलान में गड़बड़ी पकड़ी गई, जिसके बाद इसमें शामिल लोग समारोह से पहले ही कथित तौर पर फरार हो गए।
