विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने मध्य एशिया और एससीओ के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई


दुशांबे, 12 जून (आईएएनएस)। भारत के विदेश राज्य मंत्री (एमओएस) कीर्ति वर्धन सिंह ने शुक्रवार को मध्य एशिया और शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) के साथ साझेदारी के लिए भारत की प्रतिबद्धता की फिर से पुष्टि की। उन्होंने ताजिकिस्तान के दुशांबे में ‘सेंट्रल एशिया – द कोर ऑफ एससीओ : ए स्पेस ऑफ पीस एंड जॉइंट डेवलपमेंट’ थीम पर एससीओ कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेते हुए समूह में भारत की प्राथमिकता पर जोर दिया।

एमओएस कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा, “मैं भारत के लोगों और सरकार की तरफ से शुभकामनाएं देना चाहता हूं। इस साल 2026 में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन की 25वीं वर्षगांठ है। यह सच में हमारी कामयाबियों पर सोचने और वर्ल्ड ऑर्डर में चल रही दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए, खुद को फिर से ठीक करने का एक सही मौका है। यह खास तौर पर जरूरी है कि इसके दोनों सबसे बड़े फैसले लेने वाले सिस्टम, काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ स्टेट और काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट, की अध्यक्षता मध्य एशियाई देशों, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान के पास है।”

उन्होंने कहा कि यह न सिर्फ संगठन की कामयाबियों का जश्न मनाने का एक खास मौका है, बल्कि मध्य एशिया के नेतृत्व में इसके भविष्य की दिशा तय करने का भी मौका है। एससीओ एक लंबे समय तक चलने वाले इतिहास से जुड़ा हुआ है। यह एक ऐसा क्षेत्र रहा है, जहां सभ्यताएं फली-फूलीं, एक-दूसरे से बातचीत की, मुकाबला किया, एक-दूसरे से सीखा और मिलकर मानवीय तरक्की को आगे बढ़ाया। सदियों से, हमारे लोगों ने न केवल सामान और सेवाओं का लेन-देन किया, बल्कि विचार, ज्ञान, संस्कृति और मूल्यों का भी लेन-देन किया।

एमओएस ने कहा, “भारत के लिए एससीओ सिर्फ एक क्षेत्रीय समूह नहीं है। यह यूरेशिया में हमारे ऐतिहासिक और सभ्यतागत साझेदार से हमें जोड़ने वाली एक जरूरी कड़ी है। एससीओ के अंदर सहयोग के लिए हमारा दृष्टिकोण प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा, जुड़ाव और अवसर के फ्रेमवर्क से निर्देशित होता है। इस विजन में सेंट्रल एशिया की अहम जगह है। यह हमारे देशों के बीच क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने और ज्यादा आर्थिक इंटीग्रेशन को बढ़ावा देने के लिए एक अहम नोड के तौर पर काम करता है। यह भी उतना ही जरूरी है कि मध्य एशिया के अपने दोस्तों के साथ मिलकर, हम आतंकवाद के सभी रूपों के खिलाफ लड़ने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।”

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “दुशांबे, ताजिकिस्तान में ‘सेंट्रल एशिया – द कोर ऑफ एससीओ: ए स्पेस ऑफ पीस एंड जॉइंट डेवलपमेंट’ पर एससीओ कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया। सेंट्रल एशिया और एससीओ के साथ हमारी हमेशा चलने वाली साझेदारी के लिए भारत की प्रतिबद्धता को फिर से सुनिश्चित किया। एससीओ में भारत की प्राथमिकता पर जोर दिया, जिसमें युवाओं की भागीदारी, सांस्कृतिक लेन-देन, क्षेत्रीय जुड़ाव और सभ्यतागत जुड़ाव को मजबूत करना शामिल है, जिसमें भारत अगले महीने कोलकाता में पहला एससीओ सिविलाइजेशन डायलॉग फोरम आयोजित कर रहा है।”

तजाकिस्तान के विदेश मंत्री से मुलाकात के बाद एमओएस सिंह ने एक्स पर लिखा, “दुशांबे में ताजिकिस्तान के विदेश मंत्री सिरोजिद्दीन मुहरिद्दीन से मिलकर खुशी हुई। भारत-ताजिकिस्तान के बीच आपसी संबंधों के पूरे दायरे की समीक्षा की और आपसी फायदे वाले क्षेत्रों में आपसी सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। अगले महीने कोलकाता में भारत द्वारा आयोजित किए जाने वाले पहले एससीओ सिविलाइजेशनल डायलॉग में ताजिकिस्तान से उच्च स्तरीय हिस्सेदारी का अनुरोध किया। भारत और ताजिकिस्तान के बीच पुरानी दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी को फिर से सुनिश्चित किया।”

–आईएएनएस

केके/एबीएम


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