प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत करीब 11 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए बड़ी उम्मीद बनकर सामने आया उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीकॉस) गठन के 10 माह बाद भी धरातल पर नहीं उतर सका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर वित्त, श्रम, न्याय, नियोजन आदि विभागाध्यक्षों और मंत्रियों का तमाम समीक्षाओं के बाद भी नियुक्ति, भुगतान, सेवा शर्तों और एजेंसियों की निगरानी को लेकर एकीकृत एवं पारदर्शी व्यवस्था क्रियान्वयन के इंतजार में है।
मुख्यमंत्री ने 2 सितंबर 2025 को कैबिनेट की मंजूरी के बाद यूपीकॉस के गठन की घोषणा की थी। दावा किया गया था कि निगम बनने के बाद आउटसोर्स कर्मचारियों को समय पर वेतन, ईपीएफ और ईएसआई का लाभ मिलेगा। भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी होगी, एजेंसियों की मनमानी रुकेगी और सभी विभागों के लिए एक समान व्यवस्था लागू होगी। सरकार ने इसके बाद आउटसोर्स कर्मचारियों का मानदेय भी बढ़ाया।
