ढाका, 7 जून (केसरिया न्यूज़)। आज के दौर में एआई पर लोगों की निर्भरता बढ़ती जा रही है। हालांकि, एआई से जुड़े अपराधों में भी तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। रविवार को आई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से होने वाले क्रिमिनल ट्रेंड में खतरनाक बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसके साथ ही एआई यूजर्स की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है।
प्रेसेंजा इंटरनेशनल प्रेस एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इन बुरे असर को रोकने और इंस्टीट्यूशनल गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए एक पूरी नेशनल और ग्लोबल ‘एआई पॉलिसी’ या रेगुलेटरी फ्रेमवर्क लाने की तुरंत जरूरत है।
रिपोर्ट में कहा गया है, “स्थानीय फैक्ट-चेकिंग संगठन ‘रूमर स्कैनर’ के एक डेटा के मुताबिक, 2025 में देश की शोबिज इंडस्ट्री की 29 जानी-मानी महिलाओं को कुल 68 गंभीर अफवाहों और गलत जानकारी के जरिए टारगेट किया गया। सबसे चिंता की बात यह है कि इन 68 बदनाम करने वाले कैंपेन में से 50 वीडियो कंटेंट में साफ तौर पर एडवांस्ड एआई तकनीक का इस्तेमाल किया गया था।”
कई टेलीविजन स्टूडियो और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कंटेंट बनाने के लिए एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं और इन ‘डीपफेक’ को आम लोगों के लिए सच से अलग करना बहुत मुश्किल हो गया है।
इमेज बनाने के लिए एआई का इस्तेमाल युवाओं में बहुत प्रसिद्ध हो गया है और कोपायलट, मिडजर्नी, डीएएलएल-ई 3, सोरा 2, रनवे जेन 4.5 और गूगल वीओ 3.0 जैसे बातचीत वाले चैटबॉट भी देश में तेजी से अपनाए जा रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है, “विशेषज्ञों का कहना है कि एआई का यह बिना किसी रोक-टोक के फैलाव न सिर्फ लोगों की इज्जत को खराब करता है, बल्कि देश के बड़े शिक्षा प्रणाली, जॉब मार्केट और सिनेमा इंडस्ट्री को भी लंबे समय तक गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।”
तकनीकी विश्लेषक चाहते हैं कि एआई के लिए तुरंत सख्त नियम बनाए जाएं, लेकिन वे ऐसे कानूनों को विरोध और आलोचना को दबाने के लिए हथियार बनाने की इजाजत देने के खिलाफ भी कड़ी चेतावनी देते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है, “विशेषज्ञों के मुताबिक, कानून में आलोचना, जानबूझकर गलत जानकारी, हेट स्पीच, सटायर और राजनीतिक तंज को अलग-अलग डिफाइन करने के लिए साफ अंतर किया जाना चाहिए। अगर कानून साफ नहीं रहता है, तो ‘अफवाह रोकने वाले कानून’ के तेजी से ‘आलोचना को दबाने वाला कानून’ में बदलने का बड़ा रिस्क है।”
रिपोर्ट में सोशल मीडिया ग्रुप्स (जैसे फेसबुक, टिकटॉक और एक्स) की स्थानीय जवाबदेही सुनिश्चित करने की भी बात कही गई है और फेक अकाउंट्स, बॉट नेटवर्क्स, बिना लेबल वाले एआई वीडियो और कम्युनिटी कंटेंट से निपटने के लिए पारदर्शिता और स्थानीय भाषा में मॉडरेशन बढ़ाने को कहा गया है।
–केसरिया न्यूज़
