अररिया, 7 जून (आईएएनएस)। पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने चर्चित शिक्षक खान सर और ज्ञान बिंदु कोचिंग इंस्टीट्यूट के बीच चल रहे विवाद को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने इस पूरे मामले में किसी तीसरे पक्ष की साजिश की आशंका जताते हुए छात्रों से संयम, अनुशासन और शांति बनाए रखने की अपील की।
पप्पू यादव ने कहा कि बिहार की कोचिंग और शिक्षा व्यवस्था को बदनाम करने के लिए लगातार षड्यंत्र रचे जा रहे हैं और कुछ लोग प्रतिष्ठित शिक्षकों की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं।
पप्पू यादव ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि बिहार आज देश के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में तेजी से उभर रहा है। राज्य की करीब 40 प्रतिशत कोचिंग संस्थाएं राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि राजस्थान के कोटा और बेंगलुरु जैसे शिक्षा केंद्रों की तुलना में बिहार का सम्मान लगातार बढ़ रहा है। यहां छात्रों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन मिल रहा है, लेकिन इसी वजह से कुछ लोग बिहार की शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ साजिश रच रहे हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षक का सम्मान सबसे बड़ी पूंजी होती है। खान सर की लोकप्रियता ने बिहार की शिक्षा व्यवस्था को नई पहचान दिलाई है। वहीं, रौशन आनंद ने भी छात्रों के बीच विश्वास और भरोसे का माहौल तैयार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों की कोचिंग संस्थाएं सफल नहीं हो पा रही थीं, वे इन शिक्षकों की बढ़ती लोकप्रियता से असहज थे और इसी कारण उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।
सांसद ने कहा कि खान सर और रौशन सर की प्रतिभा और लोकप्रियता से जलने वाले कुछ लोगों ने उनके सम्मान को खत्म करने की गहरी साजिश रची है। उन्होंने कहा कि कुछ यूट्यूबर और ब्लॉगर भी इसका हिस्सा बने हैं और विवाद को अनावश्यक रूप से बढ़ाने का काम कर रहे हैं। पप्पू यादव ने कहा कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से शिक्षकों की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है, जिसका असर छात्रों पर भी पड़ सकता है।
पप्पू यादव ने मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि देश के बड़े और प्रतिष्ठित समाचार चैनलों में भी इस मामले को अलग नजरिए से प्रस्तुत किया जा रहा है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिन लोगों के लिए कल तक खान सर एक लोकप्रिय शिक्षक थे, आज उन्हें अलग पहचान के साथ प्रस्तुत किया जा रहा है, इसके पीछे भी एक बड़ी साजिश हो सकती है। देश में कोचिंग संस्थानों की एक तरह की मोनोपॉली कायम है और शिक्षा क्षेत्र में सक्रिय कुछ प्रभावशाली समूह बिहार के शिक्षकों की बढ़ती लोकप्रियता को पसंद नहीं कर रहे हैं।
उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त कथित अनियमितताओं पर भी चिंता व्यक्त की और कहा कि शिक्षा माफिया के प्रभाव के कारण कई परीक्षाओं और शैक्षणिक प्रक्रियाओं पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में बिहार के प्रतिभाशाली शिक्षकों को निशाना बनाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
इस दौरान पप्पू यादव ने बिहार की राजनीति से जुड़े एक अन्य मुद्दे पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव की सुरक्षा वापस लेने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इसे अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। उनके अनुसार सुरक्षा जैसे विषयों पर राजनीति करने के बजाय जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश और राज्य के सामने महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा और आर्थिक चुनौतियां कहीं अधिक गंभीर विषय हैं। रसोई गैस की बढ़ती कीमतें, डीजल और पेट्रोल के दाम तथा आम लोगों पर बढ़ता आर्थिक बोझ प्रमुख चिंताओं में शामिल हैं।
पप्पू यादव ने कहा कि आम आदमी महंगाई की मार से परेशान है और जनप्रतिनिधियों को ऐसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
–आईएएनएस
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