विश्व पर्यावरण दिवस पर पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ जंक्शन रेलवे स्टेशन पर पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और जनजागरूकता को बढ़ावा देने के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया। स्टेशन परिसर में स्वच्छता कार्यों में प्रयुक्त मशीनों और उपकरणों की प्रदर्शनी लगाई गई। यात्रियों को प्लास्टिक के स्थान पर मिट्टी के बर्तनों, कुल्हड़ों और जूट उत्पादों के उपयोग के लिए प्रेरित किया गया।
स्काउट्स एवं गाइड्स ने नुक्कड़ नाटक से वृक्ष संरक्षण, जल बचत और प्लास्टिक मुक्त जीवन का संदेश दिया। पर्यावरण और स्वच्छता पखवाड़े में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कर्मचारियों को डीआरएम गौरव अग्रवाल ने भी सम्मानित किया। मंडल के गोंडा जंक्शन, खलीलाबाद और बस्ती स्टेशनों पर भी ऐसे कार्यक्रम हुए। अपर मंडल रेल प्रबंधक (इंफ्रा) भुवनेश सिंह और अपर मंडल रेल प्रबंधक (परिचालन) नीतू भी मौजूद रहीं। उधर, अवध रनिंग रूम में आयोजित फैमिली संरक्षा सेमिनार में लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर और रनिंग स्टाफ ने कार्यस्थल की चुनौतियों, स्वास्थ्य और पारिवारिक सहयोग पर विचार साझा किए।
लखनऊ में बढ़ा 2.82 वर्ग किमी ग्रीन कवर
स्काउट्स एवं गाइड्स ने नुक्कड़ नाटक से वृक्ष संरक्षण, जल बचत और प्लास्टिक मुक्त जीवन का संदेश दिया। पर्यावरण और स्वच्छता पखवाड़े में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कर्मचारियों को डीआरएम गौरव अग्रवाल ने भी सम्मानित किया। मंडल के गोंडा जंक्शन, खलीलाबाद और बस्ती स्टेशनों पर भी ऐसे कार्यक्रम हुए। अपर मंडल रेल प्रबंधक (इंफ्रा) भुवनेश सिंह और अपर मंडल रेल प्रबंधक (परिचालन) नीतू भी मौजूद रहीं। उधर, अवध रनिंग रूम में आयोजित फैमिली संरक्षा सेमिनार में लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर और रनिंग स्टाफ ने कार्यस्थल की चुनौतियों, स्वास्थ्य और पारिवारिक सहयोग पर विचार साझा किए।
लखनऊ में बढ़ा 2.82 वर्ग किमी ग्रीन कवर
वन विभाग का दावा है कि लखनऊ में हरित क्षेत्र का विस्तार हुआ है। लगभग 2.82 वर्ग किलोमीटर अतिरिक्त हरियाली के साथ लखनऊ प्रदेश के प्रमुख हरित शहरों में जगह बनाने में सफल रहा है। करीब 631 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले लखनऊ में पांच वर्ष में विभिन्न हिस्सों में ग्रीन बेल्ट का विस्तार हुआ है। ये उपलब्धि आम नागरिकों, पर्यावरण प्रेमियों, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा स्कूल-कॉलेजों के छात्र-छात्राओं की सक्रिय भागीदारी से मिली है। पौधरोपण अभियानों में लगाए गए पौधों की निगरानी ‘हरितिमा ऐप’ से की गई। लगाए गए पौधों में लगभग 80 प्रतिशत जीवित पाए गए। शक्ति वन, युवा वन, मियावाकी वन और ग्रीन कॉरिडोर का भी हरित विस्तार में अहम योगदान है। अवध वन प्रभाग के डीएफओ सितांशु पांडेय ने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी नियमित देखभाल करने की अपील की है।
