आतंकवाद का समर्थन करने वाले और सीमा पार इसे बढ़ावा देने वाले देशों को जवाब देना चाहिए : विदेश मंत्रालय

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नई दिल्ली, 29 मई (आईएएनएस)। आतंकवाद के खिलाफ भारत का रुख हमेशा साफ रहा है और नो टॉलरेंस की नीति पर काम करता रहा है। वहीं, विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को आतंकवाद पर भारत का रुख दोहराते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उन देशों को बताना चाहिए, जो आतंकवाद का समर्थन करते हैं और सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को नई दिल्ली में एक साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल के मॉस्को दौरे के दौरान आतंकवाद पर दिए गए कमेंट्स पर एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, “हम क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म को कैसे देखते हैं, इस पर मुझे दोहराने की जरूरत नहीं है कि क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म एक खतरा है, जिससे पूरी दुनिया को एक साथ आकर लड़ना चाहिए। हमें उन देशों को बताना चाहिए, जो आतंकवाद का समर्थन करते हैं और जो अपने इलाकों से क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म को बढ़ावा दे रहे हैं।”

गुरुवार को, एनएसए अजीत डोभाल ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कोई डबल स्टैंडर्ड नहीं हो सकता है और जिम्मेदार देशों को यह तय करने में अपने विकल्प का मूल्यांकन करना होगा कि वे आतंकवाद को फंडिंग करने वालों का समर्थन करते हैं या उन्हें डिसाइसिव एक्शन से काउंटर करते हैं।

उन्होंने ये बातें मॉस्को में पहले अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा फोरम और सुरक्षा मामलों के उच्च प्रतिनिधियों की 14वीं मीटिंग के दौरान कहीं।

एनएसए डोभाल ने पश्चिम एशिया के हालात पर खास ध्यान देने की बात कही और कहा कि होर्मुज स्ट्रेट और लाल सागर समेत अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ते के जरिए व्यापार की सुरक्षित और बिना रुकावट वाली आवाजाही सुनिश्चित करना जरूरी है।

रूस में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “मीटिंग को रूसी फेडरेशन की सुरक्षा परषद के सचिव सर्गेई शोइगु ने होस्ट किया था। फोरम में ‘मल्टीपोलर दुनिया के उभरने के संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चुनौतियों और खतरों’ पर चर्चा हुई। एनएसए ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरे मापदंड नहीं हो सकते। जिम्मेदार देशों को अपने विकल्पों को देखना होगा और तय करना होगा कि वे आतंकवाद की फंडिंग का समर्थन करते हैं या उन्हें निर्णायक कार्रवाई से काउंटर करते हैं।”

इसमें आगे कहा गया, “एनएसए ने 1945 में दूसरे विश्व युद्ध के खत्म होने के बाद बने स्ट्रक्चर और इंस्टीट्यूशन में सुधारों की तुरंत जरूरत पर भी जोर दिया, ताकि उन्हें आज के अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा खतरों से निपटने में असरदार बनाया जा सके। सुधारों में ग्लोबल साउथ के विचारों को ज्यादा रिप्रेजेंटेशन और ध्यान में रखना चाहिए। पश्चिम एशिया के हालात पर खास ध्यान देने की अपील करते हुए, उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट और लाल सागर समेत अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ते के जरिए व्यापार की सुरक्षित और बिना रुकावट वाली आवाजाही सुनिश्चित करना जरूरी है।”

–आईएएनएस

केके/एबीएम

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