उत्तर प्रदेश में परिषदीय शिक्षकों के अंतरजनपदीय तबादलों पर जनगणना और शिक्षक समायोजन प्रक्रिया के कारण रोक लगा दी गई है। इससे हजारों शिक्षकों की घर वापसी का इंतजार बढ़ गया है, क्योंकि अब मार्च 2027 तक स्थानांतरण नहीं होंगे।प्रदेश के परिषदीय शिक्षकों के अंतर्जनपदीय (एक जिले से दूसरे जिले) तबादलों पर फिलहाल शून्य की स्थिति बन गई है। जनगणना कार्य और शिक्षक समायोजन प्रक्रिया के चलते बेसिक शिक्षा विभाग ने स्थानांतरण प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। इससे वर्षों से गृह जनपद जाने का इंतजार कर रहे हजारों शिक्षक और शिक्षिकाओं में निराशा बढ़ गई है।
सरकारी आदेश के अनुसार जनगणना का पहला चरण 20 जून 2026 तक चलेगा, जबकि दूसरा चरण अगले वर्ष फरवरी में होगा। जनगणना कार्य पूरा होने तक अगले वर्ष 31 मार्च तक स्थानांतरण न करने के निर्देश हैं। इसी आधार पर विभाग ने फिलहाल तबादले रोक दिए हैं।
पिछली बार जारी स्थानांतरण नीति के तहत लगभग 500 शिक्षकों का ही तबादला हो सका था, जबकि बड़ी संख्या में शिक्षक इससे वंचित रह गए थे। शिक्षक संगठनों ने वरिष्ठता आधारित स्थायी स्थानांतरण नीति लागू करने और हर वर्ष नियमित तबादले करने की मांग उठाई है।
इधर, शिक्षक समायोजन मामले में राज्य सरकार ने न्यायालय को बताया है कि विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में आपत्तियां मिली हैं, जिनका सत्यापन और निस्तारण किया जा रहा है। इसके बाद ही अधिशेष शिक्षकों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
न्यायालय का आदेश है कि अधिशेष शिक्षकों की पहचान पूरे प्रदेश में फर्स्ट इन-फर्स्ट आउट सिद्धांत के आधार पर की जाए। यानी पहले नियुक्त शिक्षक को बाद में नियुक्त शिक्षक की तुलना में प्राथमिकता मिलेगी। कक्षा छह से आठ तक के विषय अध्यापकों के मामले में यह व्यवस्था विषयवार लागू होगी।
कोर्ट ने सभी आपत्तियों का निस्तारण 20 जून तक करने और अगली सुनवाई तीन जुलाई 2026 को करने के आदेश दिए हैं। साथ ही स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई तक किसी भी शिक्षक का स्थानांतरण या पुनर्नियोजन नहीं किया जाएगा।
