उत्तर प्रदेश कर विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को विश्वास आधारित प्रशासनिक व्यवस्था बनाने पर जोर दिया। सीएम ने कहा कि यूपी सबसे ज्यादा जीएसटी करदाताओं वाला राज्य है। इसलिए जरूरी है कि ईमानदार व्यापारियों को सुविधा के साथ सम्मान मिले। उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाए। टैक्स चोरी करने वाली फर्मों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखें।
मुख्यमंत्री ने कर विभाग के अधिकारियों की मेहनत और लगन की सराहन की। उन्होंने कहा कि देश में यूपी सबसे अधिक 21.82 लाख जीएसटी करदाताओं वाला राज्य बन गया है। उन्होंने निर्देश दिए कि जीएसटी पंजीकरण, रिटर्न दाखिल, अपील निस्तारण और रिफंड जैसी प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी न हो। छोटे कारोबारियों के लिए जिला और खंड स्तर तक करदाता सहायता केंद्र चालू करने तथा तकनीकी और डेटा एनालिटिक्स के जरिए कर चोरी रोकने पर भी जोर दिया गया। बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश को जीएसटी और वैट मद में 1,15,977 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। वहीं ओटीएस योजना के रूप में 2,658 करोड़ रुपये और वैट बकाया के रूप में 800 करोड़ रुपये की वसूली की गई।
फर्जी फर्मों पर शिकंजा, 477 मामलों में एफआईआर
मुख्यमंत्री ने बोगस फर्मों के अलावा कर चोरी के मामलों में कड़ी कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि फर्जी फर्मों के खिलाफ 477 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई और 168 गिरफ्तारियां हुईं। 180 करोड़ रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट ब्लॉक की गई, जबकि कर वंचन जनित छापेमारी से 2,250 करोड़ रुपये की मांग सृजित हुई।
अपील निस्तारण में यूपी राष्ट्रीय औसत से आगे
बैठक में बताया गया कि जीएसटी रिफंड मामलों के निस्तारण की औसत अवधि यूपी में 27 दिन है, जबकि राष्ट्रीय औसत समयसीमा 48 दिन है। वर्ष 2025-26 में जीएसटी और वैट से जुड़ी कुल 63,797 अपीलों का निस्तारण किया गया। मुख्यमंत्री ने लंबित अपीलों को तय समय सीमा में निपटाने के निर्देश दिए।
