यूपी में बिजली कटौती से मचे हाहाकार के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दल, समाजवादी पार्टी को आड़े हाथ लिया है। सीएम ने कहा कि ऊर्जा संकट पर वो लोग सवाल उठा रहे हैं, जिनके समय में लोग बिजली के तारों पर कपड़े सुखाया करते थे। सपा सरकार में बिजली नहीं आती थी। यही सच्चाई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय क्या होता था, पता है? एक सप्ताह रात में बिजली आती थी तो दूसरे सप्ताह दिन में। दिनरात भरपूर बिजली कभी नहीं मिली। लेकिन आज तो पूरी बिजली दी जा रही है।सीएम ने कहा कि अब पावर शट डाउन हो रहा है और देश में कहीं पावर है नहीं तो उसके लिए विभाग को मौका देना चाहिए। विद्युत विभाग पना काम कर रहा है। मैंने समीक्षा बैठक की है।
आज जो ऊर्जा संकट उत्पन्न हो रहा है, इसके लिए केवल पावर कारपोरेशन जिम्मेदार नहीं है। बल्कि हर एक नागरिक की जिम्मेदारी बनती है कि वह पावर कॉरपोरेशन के साथ खड़ा हो। संकट का सामना करने में उनका सहयोग करें। नागरिक दायित्व भी यही बनता है।
बिजली कटौती पर हाहाकार
दरअसल, यूपी में पारा चढ़ने के साथ बिजली व्यवस्था ढीली पड़ती जा रही है। राजधानी लखनऊ से लेकर पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी तक भयंकर बिजली कटौती बनी है। बरेली में तो राज्य सरकार में वन मंत्री डॉ. अरुण कुमार को ऊर्जा मंत्री को पत्र लिखकर शिकायत करनी पड़ गई। कई जगहों पर लोग सड़कों पर उतरकर आक्रोश जाहिर करते नजर आए। बिजली कटौती से आमजन की नाराजगी के बीच समाजवादी पार्टी लगातार सरकार पर हमलावर है। एक दिन पहले ही अखिलेश यादव ने ऊर्जा मंत्री के साथ सरकार और भाजपा की अंदरूनी राजनीति पर तीखे कटाक्ष किए थे। उन्होंने बिजली व्यवस्था को महाविद्युत आपदा तक बोल दिया था।
इसी पर मुख्यमंत्री का पलटवार सामने आया है। मुख्यमंत्री ने ऊर्जा संकट के बीच जो हालात पैदा हो रहे हैं, उसमें आम लोगों से भी सहयोग की अपेक्षा जताई है।
