भुवनेश्वर, 19 मई (केसरिया न्यूज़)। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कहा कि पूर्वी भारत, देश के कृषि विकास का ग्रोथ इंजन बन सकता है। साथ ही, उन्होंने इंटीग्रेटेड फार्मिंग, दलहन-तिलहन और टिकाऊ खेती पर भी जोर दिया।
भुवनेश्वर के मेफेयर कन्वेंशन में पूर्वी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए, कृषि मंत्री ने कहा कि यह आयोजन केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूर्वी भारत की कृषि, किसानों की आजीविका और क्षेत्रीय कृषि रणनीति को नई दिशा देने के लिए गंभीर विचार-विमर्श का मंच है। साथ ही, उन्होंने पूर्वी भारत की कृषि को अधिक उत्पादक, टिकाऊ, वैज्ञानिक और लाभकारी बनाने का सशक्त आह्वान किया।
संबोधन में आगे किसानों को केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि जीवनदाता बताते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों की सेवा ही भगवान की पूजा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकसित, आत्मनिर्भर, समृद्ध और शक्तिशाली भारत की ओर बढ़ रहा है और इस यात्रा की रीढ़ कृषि है।
उन्होंने कृषिकों के सामने तीन प्रमुख लक्ष्य रखे- 140 करोड़ देशवासियों के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, पोषणयुक्त आहार उपलब्ध कराना और किसानों की बेहतर आजीविका व आय वृद्धि सुनिश्चित करना।
चौहान ने कहा कि उत्पादन बढ़ाना, लागत घटाना, उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करना, नुकसान होने पर भरपाई करना और कृषि का विविधीकरण करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि केवल धान और गेहूं से काम नहीं चलेगा, बल्कि दलहन, तिलहन, फल, सब्जियां और अन्य उच्च मूल्य फसलों की ओर भी आगे बढ़ना होगा, क्योंकि पूर्वी भारत में इन सभी क्षेत्रों में अपार संभावनाएं हैं।
उन्होंने कहा कि पूर्वी राज्यों में छोटी जोत एक बड़ी वास्तविकता है, इसलिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग को केवल नारा नहीं, बल्कि जमीन पर उतरा हुआ मॉडल बनाना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि अनाज के साथ फल, सब्जियां, मछली पालन, पशुपालन, मधुमक्खी पालन और कृषि वानिकी जैसी गतिविधियों को जोड़कर छोटे किसान की आय में बड़ी वृद्धि की जा सकती है।
वहीं, कार्यक्रम में लोगों संबोधित करते हुए ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी ने कहा कि पूर्वी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन पूर्वी राज्यों के लिए कृषि भविष्य का साझा रोडमैप तैयार करने का महत्वपूर्ण अवसर है।
उन्होंने इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मेलन पूर्वोदय की परिकल्पना को बल देगा और पूर्वी भारत की कृषि उत्पादकता, जलवायु-अनुकूल खेती और समावेशी कृषि विकास को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।
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