पेरिस, 19 मई (आईएएनएस)। प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने बांग्लादेश में श्रद्धालुओं पर हुए हमले और एक दरगाह में हुई तोड़फोड़ की कड़ी निंदा की है। संगठन को चिंता है कि इस तरह की घटनाओं को न रोकने और दोषियों को सजा न दे पाने की वजह से चरमपंथी समूहों का हौसला बढ़ेगा।
फ्रांस में स्थित जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश (जेएमबीएफ) ने कहा कि ढाका में हजरत शाह अली बगदादी की दरगाह पर श्रद्धालुओं पर हुआ हमला और 14 मई की रात को एक शांतिपूर्ण साप्ताहिक धार्मिक सभा में शामिल लोगों पर हिंसक हमला, धार्मिक स्वतंत्रता, सांस्कृतिक धरोहर और देश की सदियों पुरानी सूफी परंपराओं पर गंभीर आघात है।
प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से मानवाधिकार संगठन ने बताया कि बांग्लादेश की कट्टरपंथी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी और उसकी छात्र इकाई शिबिर से जुड़े हथियारबंद हमलावरों ने दरगाह परिसर में डंडों के साथ प्रवेश किया और निर्दोष श्रद्धालुओं पर सुनियोजित हमला किया, जिससे अफरा-तफरी मच गई और कई लोग घायल हो गए।
संगठन ने यह भी कहा कि दरगाह के बाहर पुलिस की मौजूदगी के बावजूद कानून-व्यवस्था के अधिकारी कथित तौर पर नागरिकों की रक्षा करने में असफल रहे।
जेएमबीएफ ने एक घायल व्यक्ति के हवाले से कहा, “कुछ लोग डंडों के साथ आए… उन्होंने पूरी तरह से अराजकता फैला दी। लोग इधर-उधर भागने लगे। मैं मुख्य गेट से निकलने की कोशिश कर रहा था, तभी उन्होंने मेरे सिर पर वार किया।”
संगठन ने दरगाह के अनुयायियों का हवाला देते हुए कहा कि यह हमला 5 अगस्त 2024 से बांग्लादेश में दरगाहों और सूफी स्थलों पर हो रहे हमलों और तोड़फोड़ की एक श्रृंखला का हिस्सा है।
जेएमबीएफ के संस्थापक अध्यक्ष शाहनूर इस्लाम ने कहा कि यह घटना अकेली नहीं है, बल्कि यह एक चिंताजनक और व्यवस्थित हिंसा की एक कड़ी है, जिसमें धार्मिक अल्पसंख्यकों और सूफी स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है। इस अवधि में 100 से अधिक दरगाहों पर हमले की खबर है।
संगठन ने चिंता जताई कि इन घटनाओं में शामिल किसी भी दोषी पर आरोप साबित नहीं किया गया है, जिससे स्पष्ट है कि इन्हें सजा नहीं मिलेगी।
जेएमबीएफ ने बांग्लादेश सरकार से अपील की है कि वह शाह अली बगदादी दरगाह पर हुए हमले की तुरंत, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करे तथा सभी दोषियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर सजा दे।
संगठन ने देशभर में सभी दरगाहों, धार्मिक संस्थानों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और बढ़ते धार्मिक उग्रवाद तथा राजनीतिक हिंसा के खिलाफ सख्त कदम उठाने की भी मांग की है।
–आईएएनएस
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