पश्चिम एशिया संकट के चलते सरकार के उर्वरक सब्सिडी बिल में भारी वृद्धि हुई

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नई दिल्ली, (केसरिया न्यूज़)। पश्चिम एशिया संकट के कारण आयात लागत बढ़ने से चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में सरकार का उर्वरक सब्सिडी खर्च करीब 15,000 करोड़ रुपए तक बढ़ सकता है। सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

रसायन और उर्वरक मंत्रालय के उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने सब्सिडी खर्च बढ़ने की पुष्टि की, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि इसमें कितनी प्रतिशत वृद्धि होगी।

उन्होंने कहा, “सब्सिडी बिल जरूर बढ़ेगा, लेकिन यह कितने प्रतिशत बढ़ेगा, फिलहाल मैं नहीं कह सकती।”

लागत बढ़ने के बावजूद शर्मा ने कहा कि 2026 खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों की उपलब्धता ‘संतोषजनक’ बनी हुई है। कुल 390 लाख टन की आवश्यकता के मुकाबले 51 प्रतिशत से अधिक स्टॉक उपलब्ध है और बाकी जरूरत को विभिन्न देशों से आयात के जरिए पूरा किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में देश में उर्वरकों का कुल भंडार 200.9 लाख टन है। शर्मा ने कहा, “कुल मिलाकर स्थिति मजबूत, स्थिर और आरामदायक बनी हुई है।”

देश में घरेलू उत्पादन करीब 80,000 टन प्रतिदिन की दर से चल रहा है। पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से अब तक 86.2 लाख टन उर्वरक उत्पादन हुआ है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 93 लाख टन था।

उन्होंने कहा कि यूरिया संयंत्रों के लिए पर्याप्त गैस आपूर्ति उपलब्ध है।

भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर के क्षेत्रों से उर्वरकों का आयात बढ़ाया है और अब तक करीब 22 लाख टन उर्वरक आयात किए जा चुके हैं।

उर्वरक विभाग यूरिया और जटिल उर्वरकों के उत्पादन के लिए जरूरी अन्य कच्चे माल की उपलब्धता की भी समीक्षा कर रहा है। इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए हर सप्ताह सब्सिडी भुगतान किया जा रहा है।

पीक डिमांड यानी मांग चरम पर होने के दौरान, किसी भी प्रकार की कमी न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए भारतीय उर्वरक कंपनियों ने वैश्विक स्तर पर 12 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 4 लाख मीट्रिक टन टीएसपी और 3 लाख मीट्रिक टन अमोनियम सल्फेट के लिए संयुक्त वैश्विक निविदाएं शुरू की हैं।

इसके अतिरिक्त, 5.36 लाख मीट्रिक टन अमोनिया और 5.94 लाख मीट्रिक टन सल्फर सहित कच्चे माल की खरीद के लिए भी निविदाएं प्रक्रियाधीन हैं।

सरकार ने यह भी पुष्टि की है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर से खरीदे गए लगभग 7 लाख मीट्रिक टन एनपीके उर्वरक मई और जून के दौरान भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की उम्मीद है।

किसानों के लिए बड़ी राहत देते हुए सरकार ने कहा कि प्रमुख उर्वरकों के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

उर्वरक विभाग नियमित रूप से यूरिया और फॉस्फेट एवं पोटाश आधारित उर्वरकों के उत्पादन के लिए जरूरी कच्चे माल की उपलब्धता की समीक्षा कर रहा है और हर सप्ताह सब्सिडी भुगतान जारी रख रहा है, ताकि आपूर्ति व्यवस्था सुचारु बनी रहे।

उर्वरक विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बावजूद भारत की उर्वरक सुरक्षा मजबूत और स्थिर बनी हुई है। सरकार ने घरेलू उत्पादन और आयात दोनों बढ़ाकर किसानों की जरूरतों से अधिक उपलब्धता सुनिश्चित की है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में देश के पास 199.65 लाख मीट्रिक टन का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, जो मौसमी मांग के 51 प्रतिशत से अधिक को कवर करता है। यह सामान्य बफर स्तर 33 प्रतिशत की तुलना में काफी ज्यादा है।

शर्मा ने हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि यह बेहतर अग्रिम भंडारण और कुशल लॉजिस्टिक्स प्रबंधन का परिणाम है।

उर्वरक उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए सचिवों के अधिकार प्राप्त समूह अब तक आठ बैठकें कर चुका है, ताकि किसानों को बिना किसी रुकावट के सस्ती दरों पर उर्वरक उपलब्ध कराए जा सकें।

–केसरिया न्यूज़

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