प्रदेश में गो संरक्षण को वैज्ञानिक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा प्रयोग शुरू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार गोबर, गोमूत्र और माइक्रोबियल रिसर्च आधारित तकनीक से उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार करने की योजना पर काम कर रही है। दावा है कि यह खाद पारंपरिक जैविक खाद की तुलना में 15 गुना अधिक प्रभावशाली होगी और इसे तैयार करने में समय भी 10 गुना कम लगेगा।
इस तकनीक को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कानपुर के शोधार्थियों ने विकसित किया है। सरकार इसे प्राकृतिक खेती, गो संरक्षण और ग्रामीण रोजगार के एकीकृत मॉडल के रूप में लागू करने की तैयारी में है।आईआईटी कानपुर की खोज से तैयार होगी ‘सुपर खाद’
आईआईटी कानपुर के पीएचडी शोधार्थी अक्षय श्रीवास्तव ने जेनेटिक इंजीनियरिंग, एंजाइम एक्सट्रैक्शन और माइक्रोबियल आइसोलेशन तकनीक का उपयोग करते हुए गोबर और गोमूत्र आधारित उर्वरक विकसित किया है। इस तकनीक से तैयार खाद में पोषक तत्वों की क्षमता लगभग पांच गुना अधिक बताई जा रही है। शोधकर्ताओं के अनुसार, केवल एक किलोग्राम माइक्रोबियल कॉन्सन्ट्रेट से करीब 2000 किलोग्राम जैविक उर्वरक तैयार किया जा सकता है।
कम मात्रा, ज्यादा असर
नई तकनीक से तैयार खाद की 350 से 400 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर मात्रा ही पर्याप्त होगी। यह पारंपरिक जैविक खाद की तुलना में काफी कम है, जिससे किसानों की परिवहन और श्रम लागत घटेगी। इस उत्पाद को इंडियान काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च के 40 से अधिक गुणवत्ता मानकों पर परीक्षण और प्रमाणित किए जाने का दावा किया गया है।
गोशालाएं बनेंगी ‘वेस्ट टू वेल्थ’ केंद्र, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा
प्रदेश सरकार इस तकनीक के जरिए गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने की योजना पर काम कर रही है। गोशालाओं में गोबर और गोमूत्र से जैविक खाद और बायोगैस का उत्पादन होगा। इससे गोशालाएं केवल संरक्षण केंद्र न रहकर आय सृजन का माध्यम बनेंगी। सरकार का मानना है कि यह पहल रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करेगी, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाएगी और कृषि अपशिष्ट के बेहतर प्रबंधन में मददगार साबित होगी।
महिला समूहों को मिलेगा रोजगार
इस परियोजना में स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और स्थानीय किसानों को जोड़ा जाएगा। विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण, उत्पादन और वितरण से जोड़कर नए रोजगार अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।
यदि यह मॉडल बड़े पैमाने पर सफल रहा, तो उत्तर प्रदेश देश में गो आधारित वैज्ञानिक खेती और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर तकनीक का अग्रणी केंद्र बन सकता है। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिलेगा।
