भारत सांस्कृतिक पुनरुत्थान का गवाह, विदिशा के विजय मंदिर को लेकर उम्मीदें: प्रियांक कानूनगो


विदिशा, 16 मई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के सदस्य प्रियांक कानूनगो ने शनिवार को विदिशा में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि भारत सांस्कृतिक पुनरुत्थान के नए युग में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और भोजशाला मामले में हाईकोर्ट के हालिया फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि देश अपनी प्राचीन विरासत से फिर जुड़ रहा है।

प्रियांक कानूनगो ने कहा, “हम उस सौभाग्यशाली पीढ़ी के लोग हैं जो भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान को अपनी आंखों से देख रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 500 वर्षों के संघर्ष के बाद ये सपने साकार हो रहे हैं। भोजशाला केस में आए फैसले से मध्य प्रदेश में नई उम्मीदें जगी हैं। अब विदिशा के ऐतिहासिक विजय मंदिर को लेकर भी लोगों में बड़ी उम्मीद है।”

प्रियांक कानूनगो ने विदिशा के अटल बिहारी वाजपेयी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में कथित भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के मामले पर भी गंभीर चिंता जताई। सोशल एक्टिविस्ट नितिन चौरसिया की शिकायत पर एनएचआरसी ने इस मामले को संज्ञान में लिया है।

उन्होंने बताया, “हमें शिकायत मिली थी कि मेडिकल कॉलेज में सुरक्षाकर्मियों और सहायक कर्मचारियों की जरूरी संख्या नहीं है। रजिस्टरों में नाम तो बहुत हैं, लेकिन वास्तव में स्टाफ बहुत कम है। करीब 600 आउटसोर्स कर्मचारियों को वेतन दिया जा रहा है, जबकि वास्तव में केवल 400 ही काम कर रहे हैं। फर्जी दस्तावेजों और अनियमित नियुक्तियों के भी आरोप हैं।”

उन्होंने बताया कि एनएचआरसी ने इस मामले में विदिशा के जिलाधिकारी और श्रम आयुक्त को नोटिस जारी कर 15 दिनों के अंदर एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी है। कानूनगो ने कहा कि यह मुद्दा मरीजों के मानवाधिकारों से जुड़ा है, इसलिए आयोग इसे बहुत गंभीरता से ले रहा है।

प्रियांक कानूनगो ने कहा कि देश अपने गौरवशाली अतीत की महिमा को फिर से महसूस कर रहा है। राम मंदिर, भोजशाला और अन्य ऐतिहासिक स्थलों पर हो रहे विकास कार्य इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि विदिशा का विजय मंदिर भी जल्द ही अपनी गरिमा वापस प्राप्त करेगा।

–आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी


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