नई दिल्ली, 13 मई (आईएएनएस)। ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नाइजीरियाई विदेश मंत्रालय के स्थायी सचिव, राजदूत डुनोमा उमर अहमद बुधवार को नई दिल्ली पहुंचे।
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी। लिखा, “नाइजीरियाई विदेश मंत्रालय के स्थायी सचिव, राजदूत डुनोमा उमर अहमद का ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए नई दिल्ली आगमन पर स्वागत करते हुए हमें खुशी हो रही है।”
इसी दिन इंडोनेशिया के विदेश मंत्री सुजियोनो भी नई दिल्ली पहुंचे।
विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को ही दो दिवसीय ब्रिक्स सम्मेलन की घोषणा कर दी थी। बयान के अनुसार, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर 14 और15 मई को होने वाली ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता करेंगे।
एमईए प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में बताया था कि इस बैठक में ब्रिक्स सदस्य और साझेदार देशों के विदेश मंत्री और प्रतिनिधिमंडल भाग लेंगे और वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे।
उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान सदस्य देश वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। दूसरे दिन “ब्रिक्स एट 20: बिल्डिंग फॉर रिजीलियंस, इनोवेशन, को-ऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी” विषय पर सत्र होगा। इसके बाद वैश्विक शासन व्यवस्था और बहुपक्षीय प्रणाली में सुधार पर भी चर्चा होगी।
जायसवाल ने यह भी बताया कि ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की पिछली बैठक 26 सितंबर 2025 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 80वें सत्र के दौरान हुई थी।
भारत 2026 में ब्रिक्स की थीम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2025 में रियो डी जेनेरियो में हुए 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में दिए गए दृष्टिकोण से जुड़ी है।
ब्रिक्स की शुरुआत 2006 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ब्रिक देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक से हुई थी। पहला शिखर सम्मेलन 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में आयोजित किया गया था। 2010 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद इसका विस्तार ब्रिक्स के रूप में हुआ, और 2011 में दक्षिण अफ्रीका ने पहली बार शिखर सम्मेलन में भाग लिया था।
–आईएएनएस
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