जम्मू-कश्मीर पुलिस निस्वार्थ सेवा, कर्तव्य, बलिदान और जनविश्वास का प्रतीक है: उपराज्यपाल सिन्हा


श्रीनगर, 10 मई (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को कहा कि केंद्र शासित प्रदेश की पुलिस सेवा में शामिल होना केवल एक करियर विकल्प नहीं है, बल्कि रक्त से लिखी गई विरासत का हिस्सा बनना है।

उपराज्यपाल ने ज़ेवान स्थित सशस्त्र पुलिस परिसर में आयोजित एक समारोह में जम्मू-कश्मीर पुलिस के नव-भर्ती कांस्टेबलों को नियुक्ति पत्र सौंपे।

जम्मू-कश्मीर सेवा चयन बोर्ड (जेकेएसएसबी) द्वारा संचालित एक पारदर्शी, योग्यता-आधारित प्रक्रिया के माध्यम से लगभग 4,000 रंगरूटों का चयन किया गया।

उपराज्यपाल ने नए रंगरूटों को बधाई दी और उनसे पूर्ण निष्ठा, निष्पक्षता और राष्ट्रीय सेवा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि जम्मू और कश्मीर पुलिस में शामिल होना केवल एक करियर विकल्प नहीं है, बल्कि रक्त से लिखी गई विरासत को स्वीकार करना है। मुझे विश्वास है कि आप इस अवसर पर खरे उतरेंगे और इस गौरवशाली बल का सम्मान बनाए रखेंगे।

जम्मू और कश्मीर पुलिस के बहादुर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में जो शांति और प्रगति देखने को मिल रही है, वह वर्षों से पुलिसकर्मियों द्वारा किए गए अटूट संकल्प और बलिदानों का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि जम्मू और कश्मीर पुलिस निस्वार्थ सेवा, कर्तव्य, बलिदान और जनविश्वास का प्रतीक है। इसे कानून के शासन को बनाए रखने और आतंकवाद विरोधी अभियानों को अंजाम देने में उत्कृष्टता के मानक के रूप में मान्यता प्राप्त है।

उपराज्यपाल ने आंतरिक सुरक्षा के बदलते स्वरूप पर भी चर्चा की और पुलिसिंग कार्यों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के व्यापक एकीकरण का आह्वान किया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर पुलिस से बल को भविष्य के लिए तैयार करने हेतु एक रोडमैप तैयार करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि युद्धक्षेत्र भौतिक सीमाओं से परे विस्तारित हो गया है और चेतावनी दी कि साइबर अपराध, नार्को-आतंकवाद, डिजिटल धोखाधड़ी और कथात्मक युद्ध जैसे उभरते खतरे पारंपरिक हथियारों के बजाय प्रौद्योगिकी द्वारा संचालित हो रहे हैं।

उपराज्यपाल ने दोहराया कि आतंकवाद के सभी रूपों का पूर्ण उन्मूलन और जन सुरक्षा सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि आज दुनिया के सबसे खतरनाक अपराधी और आतंकवादी हमेशा हथियार लेकर नहीं चलते बल्कि वे कोड, डेटा और एन्क्रिप्टेड नेटवर्क का इस्तेमाल करके सीमाओं के पार काम करते हैं। साइबर अपराध, नशीले पदार्थों से जुड़ा आतंकवाद, डिजिटल धोखाधड़ी और कथात्मक युद्ध अब दूर के भविष्य के खतरे नहीं रहे; ये वर्तमान की कड़वी सच्चाई हैं। ये जानें ले रहे हैं, आजीविका छीन रहे हैं और उस भरोसे को कमजोर कर रहे हैं जिस पर हर व्यवस्था की स्थिरता टिकी होती है।

–आईएएनएस

एमएस/


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