केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की इंडियन चैंबर ऑफ फूड एंड एग्रीकल्चर के चेयरमैन डॉ एमजे खान के साथ बैठक


नई दिल्ली, 7 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को इंडियन चैंबर ऑफ फूड एंड एग्रीकल्चर के चेयरमैन डॉ. एमजे खान के साथ बैठक की। उन्होंने खुद इसकी जानकारी दी।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि इंडियन चैंबर ऑफ फूड एंड एग्रीकल्चर के चेयरमैन डॉ. एमजे खान के साथ बैठक की। हमारे किसानों की जिंदगी की क्वालिटी को और बेहतर बनाने, ग्लोबल एग्रीकल्चरल माहौल में भारत की जगह मजबूत करने, अफ्रीकी इलाके के साथ सहयोग को गहरा करने और इस सेक्टर में भारत की एक्सपर्टीज को शेयर करने के तरीकों पर चर्चा की।

उन्होंने आगे कहा कि साथ ही, लंबे समय की फूड सिक्योरिटी के लिए एग्रीकल्चरल सहयोग बढ़ाने के नए तरीकों पर भी बात हुई।

इससे पहले पीयूष गोयल ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि डेल्हीवरी के को-फाउंडर और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सूरज सहारन से मिलकर खुशी हुई। इनोवेशन और टेक-लेड बिजनेस मॉडल और एंटरप्राइज को बढ़ाने के उनके सफर पर गहरी बातचीत हुई। इंडियन लॉजिस्टिक्स को ज्यादा ट्रांसपेरेंट, एफिशिएंट और फ्यूचर-रेडी बनाने में उनका असर देखकर बहुत अच्छा लगा।

वहीं, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को वाणिज्य विभाग (डीओसी) और उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस दौरान भारतीय व्यवसायों के वैश्विक विस्तार को बढ़ाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया गया।

मंत्री के अनुसार, चर्चा निर्यात और निवेश को बढ़ावा देने, इच्छुक निर्यातकों के लिए अवसर खोलने और नए वैश्विक बाजारों में पैठ बनाने पर केंद्रित थी।

केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि भारतीय व्यवसायों के लिए वैश्विक स्तर पर पहुंच बढ़ाने, निर्यात प्रोत्साहन प्रयासों को मजबूत करने और देश भर के उद्योगों की भागीदारी बढ़ाने के उपायों पर भी विचार किया गया।

वाणिज्य मंत्रालय द्वारा संकलित नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी टैरिफ विवाद और भू-राजनीतिक तनावों से उत्पन्न अनिश्चितताओं के बावजूद, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत के कुल माल और सेवाओं के निर्यात में 4.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह रिकॉर्ड 863.11 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 825.26 अरब डॉलर था।

माल निर्यात में वित्तीय वर्ष के दौरान 0.93 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह 2024-25 के 437.70 बिलियन डॉलर से बढ़कर 441.78 बिलियन डॉलर हो गया। यह वृद्धि जहाजों की आवाजाही में व्यवधान और विदेशी बाजारों में मांग की अनिश्चितताओं से प्रभावित एक कठिन वर्ष में हुई।

सेवा निर्यात में 8.71 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई और यह 2025-26 में 421.32 बिलियन डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले वित्तीय वर्ष के 387.55 बिलियन डॉलर से अधिक है। यह वृद्धि भारत की आईटी सेवाओं, व्यावसायिक समाधानों और पेशेवर विशेषज्ञता की निरंतर वैश्विक मांग को दर्शाती है।

–आईएएनएस

डीकेपी/


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