ओटावा, 3 मई (आईएएनएस)। कनाडा की खुफिया एजेंसी कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा (सीएसआईएस) ने अपनी नवीनतम सार्वजनिक रिपोर्ट में खालिस्तानी तत्वों को एक हिंसक चरमपंथी खतरे के रूप में चिन्हित किया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कनाडा में मौजूद खालिस्तानी चरमपंथियों का एक छोटा लेकिन सक्रिय समूह देश को अपने आधार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है, जहां से वे प्रचार, फंड जुटाने और हिंसक गतिविधियों की योजना बनाते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ये लोग सामुदायिक संस्थानों का दुरुपयोग कर धन जुटाते हैं, जिसका इस्तेमाल हिंसक गतिविधियों में किया जाता है। हालांकि, पिछले वर्ष कनाडा में इस तरह का कोई हमला नहीं हुआ, लेकिन रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि उनकी गतिविधियां राष्ट्रीय सुरक्षा और कनाडाई हितों के लिए खतरा बनी हुई हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विदेशी दखल कनाडा की राजनीति में काफी आक्रामक और चालाक तरीके से जारी है। इसमें मुख्य तौर पर चीन, रूस, ईरान और पाकिस्तान शामिल हैं। ये देश अलग-अलग तरीकों से कनाडा की संस्थाओं को कमजोर करने, लोगों की सोच को प्रभावित करने और लोकतांत्रिक सिस्टम में भरोसा कम करने की कोशिश करते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, चीन की खुफिया एजेंसियां अब नए तरीके अपनाते हुए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर फर्जी कंपनियों के जरिए नौकरी के विज्ञापन डालकर ऐसे लोगों को निशाना बना रही हैं, जिनके पास संवेदनशील या गोपनीय जानकारी तक पहुंच है। खासकर उन लोगों को टारगेट किया जाता है जो आर्थिक परेशानी में हों या करियर में आगे बढ़ना चाहते हों। वहीं, रूस सोशल मीडिया, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और गलत सूचना अभियानों के जरिए समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश करता है।
ईरान पर कनाडा में अपने विरोधियों के खिलाफ उत्पीड़न, अपहरण और हत्या की साजिश रचने के आरोप लगाए गए हैं। वहीं पाकिस्तान पर आरोप है कि वह अपने नेटवर्क के जरिए राजनेताओं, पत्रकारों, शिक्षाविदों और सामुदायिक नेताओं से गुप्त संबंध बनाकर मीडिया नैरेटिव को प्रभावित करता है और असहमति को दबाने की कोशिश करता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि खालिस्तानी चरमपंथ बहुसंस्कृतिवाद की नीतियों की कमजोरियों का फायदा उठाता है, जहां वैध राजनीतिक मांगें और हिंसक समर्थन के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि अब आधे-अधूरे कदमों से काम नहीं चलेगा। सरकार को सीएसआईएस और सुरक्षा एजेंसियों को ज्यादा ताकत और संसाधन देने चाहिए, ताकि वे इन नेटवर्क्स को मजबूती से रोक सकें। इसमें विदेशी फंडिंग की सख्त जांच, ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई और लोगों के सामने साफ जानकारी रखना शामिल है।
साथ ही कहा गया है कि सभी राजनीतिक दलों को एकजुट होकर हिंसक उग्रवाद को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं करना चाहिए, चाहे उसे सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के नाम पर ही क्यों न दिखाया जाए।
अंत में रिपोर्ट चेतावनी देती है कि अगर इसे नजरअंदाज किया गया तो यह कनाडा की सुरक्षा और लोकतंत्र दोनों के लिए खतरा बन सकता है। अब फैसला कनाडा को करना है या तो अपने मूल्यों की मजबूती से रक्षा करे या उन्हें अंदर से कमजोर होते देखता रहे। समय तेजी से निकल रहा है।
–आईएएनएस
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