अलीगंज के राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में गुजरात की एक कंपनी द्वारा आयोजित रोजगार मेले में आईटीआई पास अभ्यर्थी अपने ही ट्रेड का नाम तक सही से नहीं बता सके। वाराणसी में स्मार्ट मीटर लगाने वाली कंपनी के मेले में कई उम्मीदवार सामान्य औजारों के नाम तक पहचानने में असफल रहे।
इन घटनाओं ने संस्थानों में प्रशिक्षण व्यवस्था की वास्तविक स्थिति उजागर कर दी है, जहां प्रमाण पत्र तो मिल रहे हैं, लेकिन व्यावहारिक ज्ञान का अभाव साफ दिख रहा है। इसी स्किल गैप को दूर करने के लिए औद्योगिक प्रशिक्षण निदेशालय ने नई पहल करते हुए उद्योगों में 25 प्रतिशत अनिवार्य प्रशिक्षण लागू करने का निर्णय लिया है।
इसके लिए संस्थानों को दोहरी शिक्षण प्रणाली (डीएसटी) योजना के तहत उद्योगों के साथ समन्वय कर विद्यार्थियों को अप्रेंटिसशिप और लाइव प्रोजेक्ट्स में शामिल कराना होगा। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को वास्तविक कार्य वातावरण, मशीनों के संचालन, सुरक्षा मानकों और उत्पादन प्रक्रियाओं का अनुभव देना है।
राजधानी समेत प्रदेश की सभी 305 राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में लागू होगा। यही नहीं संस्थान के प्रधानाचार्यों की जिम्मेदारी भी होगी कि ऐसे अभ्यर्थियों को नौकरी का अवसर भी दिलाएं।
58 ट्रेडों के विद्यार्थियों को होगा लाभ
जुलाई में शुरू हाेने वाले नए सत्र में फिटर, इलेक्ट्रीशियन, इलेक्ट्रिक पावर डिस्ट्रब्यूशन, इलेक्ट्रानिक्स मैकेनिक, इंस्ट्रूमेंट मैकेनिक, वेल्डर, एमएमवी, मैकेनिक डीजल, ट्रैक्टर मैकेनिक, डीजल मैकेनिक, कोपा, पेंटर जनरल और वायरमैन समेत 58 ट्रेडों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियोें को फायदा होगा।
मई-जून से प्रवेश प्रक्रिया शुरू होगी। वहीं अलीगंज के राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में ड्यूल सिस्टम ऑफ ट्रेनिंग यानी दोहरी शिक्षण प्रणाली (डीएसटी) लागू करने के लिए संस्थान के प्राधानाचार्य राजकुमार यादव ने पहले ही टाटा मोटर्स बीच एमओयू पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।
तकनीकी शिक्षा को रोजगार से जोड़ना हमारी प्राथमिकता है। छात्रों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान नहीं, बल्कि उद्योगों में काम का वास्तविक अनुभव मिलना जरूरी है। अभी तक 150 घंटे की आन-जाब ट्रेनिंग (ओजेटी) दी जाती थी, लेकिन अब इस ड्यूल सिस्टम ऑफ ट्रेनिंग यानी दोहरी शिक्षण प्रणाली (डीएसटी) योजना से उनकी रोजगार पाने की क्षमता बढ़ेगी। इसके साथ ही संस्थानों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि प्रशिक्षण पूरा होने से कुछ महीने पहले ही छात्रों को नौकरी दिलाई जाए। सभी पास के औद्योगिक संस्थानों से करार करना होगा।
