यूपी: सीमावर्ती जिलों में तेल किल्लत की अफवाह,बढ़ गई पेट्रोल-डीजल की मांग, आपूर्ति को लेकर प्रशासन का बड़ा बयान 

उत्तर प्रदेश के नेपाल सीमा से लगे जिलों में पेट्रोल और डीजल की मांग में अचानक आई तेजी ने प्रशासन और तेल कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि यह स्थिति किसी वास्तविक कमी के कारण नहीं, बल्कि अफवाहों, सख्त एंटी-होर्डिंग उपायों और सीमा पार कीमतों के अंतर के चलते पैदा हुई “डिमांड डिस्टॉर्शन” है। अधिकारियों के अनुसार, नेपाल में पेट्रोल की कीमत भारत से करीब 60 प्रति लीटर अधिक होने के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में ईंधन के छोटे स्तर पर सीमा पार ले जाए जाने की आशंका है। हालांकि किसी संगठित तस्करी की पुष्टि नहीं हुई है लेकिन प्रशासन ने निगरानी कड़ी कर दी है। इसका सबसे ज्यादा असर बहराइच, लखीमपुर, गोंडा, महराजगंज और बस्ती जैसे जिलों में देखा जा रहा है, जहां कम समय में बिक्री में तेज उछाल दर्ज किया गया है। 

वहीं लखनऊ के आसपास के इलाकों में भी पेट्रोल पंपों पर सामान्य से अधिक भीड़ देखी जा रही है। स्थिति को और जटिल बनाने में तेल कंपनियों के एंटी-होर्डिंग उपायों की भी भूमिका है। कई जगहों पर एक बार में लगभग 20 लीटर तक ही ईंधन देने की सीमा तय कर दी गई है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में, खासकर किसानों को परेशानी हो रही है, जो आमतौर पर 200 लीटर के ड्रम में डीजल स्टोर करते हैं। अब उन्हें कई बार छोटे-छोटे लेनदेन करने पड़ रहे हैं, जिससे पेट्रोल पंपों पर दबाव बढ़ गया है। 

अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और सामान्य रूप से ही ईंधन खरीदें, क्योंकि राज्य में पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है। तेल कंपनियों का कहना है कि आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। आईओसीएल के राज्य प्रमुख संजय भंडारी के अनुसार, “पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। मौजूदा उछाल अफवाहों के कारण हो रही पैनिक बाइंग का नतीजा है।” उन्होंने बताया कि सीमावर्ती जिलों में आपूर्ति बढ़ा दी गई है, कुछ जगहों पर तो डिलीवरी लगभग दोगुनी कर दी गई है। 

इसके अलावा सोशल मीडिया पर चुनाव के बाद ईंधन कीमतों में संभावित बढ़ोतरी की अफवाहों और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चर्चाओं ने लोगों में चिंता बढ़ा दी है। नतीजतन लोग जरूरत से ज्यादा ईंधन खरीद रहे हैं, जिससे पंपों पर भीड़ और बढ़ गई है। उत्तर प्रदेश स्टेट पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रंजीत सिंह ने भी कहा कि यह स्थिति लॉजिस्टिक टाइमिंग, अफवाहों और पैनिक बाइंग का मिश्रण है, न कि किसी आपूर्ति संकट का संकेत है। 

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