इरोड, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने गुरुवार को बीजेपी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की नीतियों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने एनडीए पर माइक्रो, स्मॉल व मीडियम एंटरप्राइजेज और पारंपरिक बुनकरों जैसे अहम क्षेत्रों के हितों की रक्षा करने में विफल रहने का आरोप लगाया।
इरोड में आयोजित चुनावी रैली को संबोधित करते हुए स्टालिन ने कहा कि केंद्र की नीतियों ने राज्य की आर्थिक स्थिति को और खराब कर दिया है, खासकर पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक संकट के संदर्भ में। उन्होंने दावा किया कि एमएसएमई, जो तमिलनाडु की औद्योगिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, बाहरी झटकों और केंद्र सरकार से पर्याप्त समर्थन न मिलने के कारण कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण सप्लाई चेन और निर्यात बाजार प्रभावित हुए हैं। लेकिन, केंद्र छोटे व्यवसायों की मदद करने में प्रभावी ढंग से हस्तक्षेप करने में असफल रहा है।
सामाजिक और शैक्षिक मुद्दों पर चर्चा करते हुए स्टालिन ने राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट) और नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के प्रति अपना विरोध दोहराया। उन्होंने इन कदमों को तमिलनाडु के लोगों के अधिकारों और आकांक्षाओं को कमजोर करने वाला बताया। स्टालिन ने एनडीए सरकार पर राज्य की बार-बार की मांगों को नज़रअंदाज़ करने का आरोप लगाया और कहा कि नीट ग्रामीण और वंचित छात्रों को नुकसान पहुंचाती है।
मुख्यमंत्री ने एआईएडीएमके-बीजेपी गठबंधन पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि उसने राज्य को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर चुप रहकर जनता के भरोसे को कमजोर किया। उन्होंने केंद्र की यह विफलता भी उजागर की कि वह तमिलनाडु के बुनकरों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के दबावों, जिनमें अमेरिका जैसे देशों द्वारा लगाए गए टैरिफ भी शामिल हैं, से बचाने में असफल रहा।
स्टालिन ने कहा कि केंद्र की नीतियों और उनके असर ने राज्य की अर्थव्यवस्था और पारंपरिक उद्योगों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, और इसके लिए प्रभावी कदम उठाना आवश्यक है।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने एक चुनावी रैली में एआईएडीएमके नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी का मज़ाक उड़ाते हुए उन पर पक्षपात करने और करीबी रिश्तेदारों को सरकारी कॉन्ट्रैक्ट देने का आरोप लगाया। उन्होंने बिना किसी नाम लिए विपक्ष के अन्य नेताओं पर भी भ्रष्टाचार और सत्ता के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया।
स्टालिन ने एनडीए के “डबल इंजन” नारे का मज़ाक उड़ाते हुए इसे “डब्बा इंजन” कहा और दावा किया कि गठबंधन में कार्यकुशलता और दिशा दोनों की कमी है। उन्होंने वोटरों पर भरोसा जताया कि आगामी विधानसभा चुनाव में वे एनडीए को नकार देंगे और डीएमके की नेतृत्व वाली गठबंधन को मजबूत बहुमत के साथ सत्ता में वापस लाएंगे।
यह रैली स्टालिन के राज्यस्तरीय चुनाव अभियान का हिस्सा थी, जिसका उद्देश्य चुनाव से पहले जनता का समर्थन मजबूत करना है। रैली में डीएमके की गवर्नेंस, सामाजिक न्याय और आर्थिक मजबूती को मुख्य थीम के रूप में रखा गया।
–आईएएनएस
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