गांधीनगर, 23 मई (आईएएनएस)। गुजरात सरकार 1,147 करोड़ रुपए की लागत से सड़क निर्माण में हरित निर्माण विधियों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए तैयार है। इसके तहत कई जिलों में 20 सड़क परियोजनाएं शुरू की जा रही हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य सड़कों की मजबूती बढ़ाना, निर्माण लागत कम करना और मौजूदा सड़क सामग्रियों का बड़े पैमाने पर पुन: उपयोग करना है।
यह पहल राज्य के बुनियादी ढांचा विकास कार्यक्रम का हिस्सा है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ी राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप है और गुजरात में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में कार्यान्वित की जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, यह दृष्टिकोण जलवायु-अनुकूल इंजीनियरिंग पद्धतियों और आधुनिक प्रौद्योगिकी के एकीकरण पर केंद्रित है, ताकि सड़कों के जीवन चक्र को बढ़ाया जा सके और पर्यावरणीय प्रभाव को कम किया जा सके।
कार्यक्रम में पाटन, गिर सोमनाथ, महिसागर, भरूच, मोरबी, सुरेंद्रनगर, सूरत, वडोदरा, छोटा उदेपुर, आनंद, मेहसाणा, कच्छ, भावनगर, जामनगर और नर्मदा सहित जिलों की 20 सड़कें शामिल हैं।
प्रमुख गलियारों में पाटन में लानवा-मनुंद-सांदर-बालिसाना और राधनपुर-मशाली-मधापुरा, गिर सोमनाथ में भिड़िया सोमनाथ रोड, महिसागर में संतरामपुर-जालोद रोड, भरूच में दयादरा-नबीपुर-जानोर और इलाव-कोसांबा रोड, मोरबी में मोरबी-नानी वावडी-बाघथला रोड, सुरेंद्रनगर बाईपास रोड, और सूरत में डिंडोली-कराडवा-इकलेरा रोड शामिल हैं। वडोदरा में मंगलेज-नरेश्वर और कर्जन-आमोद रोड, छोटा उदेपुर में कोसिंदरा-भाखा रोड, आनंद में इसरवाडा-उंडेल और वडताल-जोल-बकरोल रोड, मेहसाणा में वालम-काडी और पेप्लू-कपरा रोड, कच्छ में लूनी-गुंडला-पत्री-टप्पर-बबिया रोड, भावनगर में तलाजा-गोपनाथ रोड, जामनगर में कलावड-जामवंतली-फला रोड, और नर्मदा जिले में कोठारा अप्रोच रोड हैं।
कार्यक्रम से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि कार्यों में सड़क चौड़ीकरण, पुनर्संदर्भन, चयनित हिस्सों में चार लेन बनाना, आरसीसी गटर लाइन, साइड शोल्डर का निर्माण, मिट्टी का काम, सड़क सहायक उपकरण, रंबल स्ट्रिप्स और सुरक्षात्मक संरचनाओं की स्थापना शामिल होगी।
यातायात की तीव्रता और जमीनी स्थिति के आधार पर व्हाइट टॉपिंग, ग्लास ग्रिड सुदृढ़ीकरण और अन्य स्थिरीकरण तकनीकों जैसे उन्नत इंजीनियरिंग उपायों का उपयोग किया जाएगा।
अधिकारियों ने आगे कहा कि प्रत्येक हिस्से के लिए तकनीक का चयन साइट-विशिष्ट होगा, जो भार आवश्यकताओं और दीर्घकालिक रखरखाव संबंधी विचारों पर आधारित होगा।
कार्यक्रम का एक केंद्रीय घटक हरित निर्माण तकनीकों के माध्यम से पुनर्चक्रित सड़क सामग्री का उपयोग है।
इस प्रक्रिया में मौजूदा सड़क परतों की खुदाई, उसके बाद चूने और यांत्रिक चूर्णीकरण का उपयोग करके स्थिरीकरण शामिल है। पुनः प्राप्त सामग्री को संघनन, सीमेंट उपचार और रासायनिक स्थिरीकरण के बाद साइट पर ही पुनः उपयोग किया जाता है।
आधुनिक मशीनों से समतलीकरण और सुदृढ़ीकरण के बाद, तनाव अवशोषक झिल्ली अंतर्परत (एसएएमआई) लगाने से पहले लगभग सात दिनों की उपचार अवधि का पालन किया जाता है, जो दरारों को कम करने और वाहनों के भार को अधिक प्रभावी ढंग से वितरित करने के लिए डिजाइन की गई फाइबर-आधारित सुरक्षात्मक परत है।
–आईएएनएस
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