लखनऊ, 13 फरवरी (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने कानून व्यवस्था, एनकाउंटर नीति, भ्रष्टाचार, सरकारी शिक्षा और रोजगार के मुद्दों पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि सिर्फ बजट घोषणाओं से विकास संभव नहीं है, जब तक भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी।
माता प्रसाद पांडेय ने प्रदेश में स्थायी डीजीपी की नियुक्ति की मांग करते हुए कहा कि कार्यवाहक डीजीपी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाते। जब शीर्ष पद अस्थायी होगा तो व्यवस्था पर उसका असर पड़ता है। दरोगा और पुलिसकर्मियों के खिलाफ डकैती जैसे मामलों में नाम आ रहे हैं, फिर भी कहा जाता है कि कानून-व्यवस्था ठीक है।
नेता प्रतिपक्ष ने पुलिस एनकाउंटर पर सवाल उठाते हुए कहा कि अपराधियों को गोली से उड़ाने से कानून-व्यवस्था दुरुस्त नहीं होती। उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं, फिर भी लगातार एनकाउंटर हो रहे हैं। यह कैसा एनकाउंटर है, जिसमें मारने वाला कभी नहीं मरता, सिपाही को खरोंच तक नहीं आती?”
उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि इस प्रचलन को रोका जाए, अन्यथा भविष्य में इसके गंभीर परिणाम होंगे। किसी के जीने का अधिकार छीनने का हक किसी को नहीं है। यदि पैरवी मजबूत हो तो दोषियों को अदालत से सजा दिलाई जा सकती है। माता प्रसाद ने विजय मिश्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि वह अपराधी हैं तो कानूनन कार्रवाई हो, लेकिन उनके बेटे को बिना दोष के जेल भेजना उचित नहीं है। यदि दोषी हैं तो दंड दीजिए, लेकिन भविष्य बर्बाद मत करिए।
नेता प्रतिपक्ष ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को बदहाल बताते हुए कहा कि 70-80 हजार शिक्षकों को वेतन दिया जा रहा है, स्कूलों की इमारतें भी सुधर रही हैं, लेकिन गरीब बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है। सरकारी स्कूल में पढ़ा बच्चा अच्छी नौकरी नहीं पा पाता, जबकि कॉन्वेंट स्कूल के बच्चे बड़े पदों तक पहुंच जाते हैं। इस असमानता पर गंभीरता से ध्यान देना होगा।
उन्होंने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण में जो बातें लिखी हैं, यदि वे धरातल पर उतर जाएं तो प्रदेश का कायाकल्प हो सकता है, लेकिन भ्रष्टाचार सबसे बड़ी समस्या है। गांव से शहर तक लोग भ्रष्टाचार से पीड़ित हैं। लोकायुक्त को दी गई जांच रिपोर्टें सदन में नहीं लाई गईं। यदि कार्रवाई नहीं होगी तो लोकपाल और लोकायुक्त का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।
माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि सरकार जीडीपी बढ़ने का दावा करती है, लेकिन रोजगार के अवसर नहीं बढ़े। कोविड काल में लोगों को दिल्ली-मुंबई से पैदल लौटना पड़ा, क्योंकि प्रदेश में पर्याप्त रोजगार नहीं था। सरकारी नौकरी नहीं दे सकते तो छोटे उद्योग-धंधों को बढ़ावा दीजिए।
चर्चा के दौरान आरक्षण के मुद्दे पर मंत्री संजय निषाद और माता प्रसाद पांडेय के बीच तीखी बहस भी हुई। विवादित शब्द के इस्तेमाल पर हंगामा हुआ, जिसे बाद में विधानसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही से हटाने का निर्देश दिया।
–आईएएनएस
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