उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने गंगा एक्सप्रेसवे को केवल परिवहन का मार्ग नहीं, बल्कि देश के सबसे बड़े ‘प्रॉफिट कॉरिडोर’ में तब्दील कर दिया है। एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित हो रहे इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर्स (IMLC) अब निवेशकों के लिए एक स्वर्ग के समान हैं। बहुस्तरीय सब्सिडी, भारी टैक्स छूट और ‘निवेश मित्र’ जैसी पारदर्शी व्यवस्था के जरिए सरकार ने एक ऐसा सपोर्ट सिस्टम तैयार किया है, जो न केवल उद्योग लगाने की लागत को कम करेगा, बल्कि मुनाफे की गारंटी भी देगा। अब गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे उद्योग लगाना न सिर्फ आसान है, बल्कि आर्थिक रूप से सबसे अधिक फायदेमंद सौदा बन गया है।
लागत में भारी कटौती: सब्सिडी और टैक्स रिइम्बर्समेंट का ‘कवच’
सरकार ने अपनी औद्योगिक नीति के जरिए निवेशकों की शुरुआती वित्तीय बाधाओं को दूर कर दिया है।
- कैपिटल सब्सिडी: उद्योगों को उनके पात्र पूंजी निवेश (ECI) पर 42% तक की कैपिटल सब्सिडी दी जा रही है।
- GST में राहत: मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों को उनके निवेश के 300% तक 100% नेट एसजीएसटी रिइम्बर्समेंट की सुविधा दी जा रही है, जो लंबे समय तक व्यापार को आर्थिक मजबूती प्रदान करेगी।
- स्टाम्प ड्यूटी में छूट: भूमि अधिग्रहण को किफायती बनाने के लिए आईएमएलसी में जमीन खरीदने पर 100% स्टाम्प ड्यूटी छूट का प्रावधान है।
ग्लोबल निवेश के लिए विशेष रियायतें (FDI & Fortune 500)
विदेशी निवेशकों और दुनिया की दिग्गज कंपनियों को आकर्षित करने के लिए सरकार ने विशेष रणनीतिक रियायतें दी हैं।
- लैंड सब्सिडी: सरकारी भूमि पर 80% तक फ्रंट-एंड लैंड सब्सिडी उपलब्ध है।
- बिजली शुल्क: फॉर्च्यून ग्लोबल 500 कंपनियों को 5 वर्षों तक 100% इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी से छूट दी जाएगी।
- ग्रीन और R&D इंसेंटिव: पर्यावरण अनुकूल उद्योगों के लिए ₹2.5 करोड़ तक और नवाचार (Research & Development) के लिए ₹10 करोड़ तक का विशेष अनुदान दिया जा रहा है।
