मुंबई, 30 जुलाई (आईएएनएस)। एफआईएसयू वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में पदक जीतने वाली पहली भारतीय जूडोका यामिनी मौर्या, ग्लासगो में आयोजित हो रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में हिस्सा ले रही हैं। यामिनी अब अपनी क्षमता का प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करना चाहती हैं।
यामिनी मौर्या ने महिलाओं की 57 किग्रा वर्ग में भारत की शीर्ष जूडोका में से एक के तौर पर खुद को स्थापित किया है। 28 साल की इस खिलाड़ी ने अफ्रीकन ओपन और एशियन ओपन में स्वर्ण पदक जीता है। अब वह ग्लासगो में सफलता पाने के लिए उसी अनुभव पर भरोसा कर रही हैं।
अपने इवेंट से पहले उन्होंने कहा, “जूडो में, आप बहुत आगे की नहीं सोच सकते क्योंकि हर बाउट अलग होता है। मेरा फोकस हमेशा मेरे सामने वाले मैच पर होता है और हमने ट्रेनिंग में जिस पर काम किया है, उसे करने पर। तैयारी अच्छी रही है, और मैं आत्मविश्वास महसूस कर रही हूं। अब यह शांत रहने, मैट पर सही फैसले लेने और हर मुकाबले में अपना श्रेष्ठ देने के बारे में है।”
यामिनी ने कहा कि पिछले सभी अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में मिले अनुभव ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया है।
उन्होंने आगे कहा, “मजबूत अंतरराष्ट्रीय विपक्षी के खिलाफ मुकाबला करने से आपको हर बार कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। आप समझते हैं कि आपको कहां सुधार करने की जरूरत है और दबाव में क्या काम करता है। उन अनुभवों ने मुझे एक बेहतर एथलीट बनने में मदद की है। मैं कॉमनवेल्थ गेम्स में खुद को फिर से टेस्ट करने के लिए उत्साहित हूं।”
यामिनी ने कहा, “इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट में ट्रेनिंग का सबसे बड़ा फायदा यह है कि सब कुछ एक ही जगह पर हो जाता है। न्यूट्रिशन और फिजियोथेरेपी से लेकर रिकवरी और ट्रेनिंग तक, हमारे आस-पास एक बहुत अच्छा सपोर्ट सिस्टम है, इसलिए मैं पूरी तरह से जूडो पर फोकस कर सकती हूं। अलग-अलग खेलों के एथलीट के साथ कैंपस में रहना, जो सभी एक ही सपने का पीछा कर रहे हैं, यह भी बहुत प्रेरित करने वाला है। यह आपको हर दिन और मेहनत करने और एक बेहतर एथलीट बनने के लिए प्रेरित करता है।”
उन्होंने कहा, “भारत की जर्सी पहनना हमेशा गर्व की बात होती है। हर एथलीट देश के लिए अच्छा प्रदर्शन करना चाहता है। मैं भी अलग नहीं हूं। मैं हर बाउट में आत्मविश्वास के साथ जाऊंगी, अपनी पूरी ताकत और स्किल लगाऊंगी और भारत को गर्व महसूस कराने की कोशिश करूंगी।”
–आईएएनएस
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