ऊर्जा क्षेत्र में पिछले 6-7 वर्षों के काम से मध्य पूर्व संकट के दौरान निर्बाध कच्चे तेल की आपूर्ति हुई सुनिश्चित : पूर्व बीपीसीएल निदेशक

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नई दिल्ली, (केसरिया न्यूज़)। भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के पूर्व निदेशक (एचआर) राज कुमार दुबे ने मंगलवार को कहा कि मध्य पूर्व संकट के दौरान कच्चे तेल और गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने में बीते छह-सात वर्षों में सरकार की ओर से किए गए काम ने अहम भूमिका निभाई है।

समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में दुबे ने कहा कि जब मध्य पूर्व संकट शुरू हुआ तो सबसे पहली चुनौती कीमत नहीं, बल्कि कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करना था। इस दौरान सरकार की ओर से ऊर्जा क्षेत्र में 6-7 वर्षों में किए गए काम ने अहम भूमिका निभाई, जिससे संकट के दौरान देश की आपूर्ति निर्बाध रही। इसमें कच्चे तेल देशों की आपूर्तिकर्ताओं की संख्या को 20 से बढ़ाकर 41 करना शामिल है।

उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने कई देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने पर काम किया है और इसका असर हमें डिप्लोमेटिक चैनल के प्रभावी इस्तेमाल में दिखा।

दुबे ने आगे कहा कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री के पूर्व अधिकारी होने का फायदा भी देश को मिला। इससे समन्वय काफी आसान हो गया। उनकी सफलता इस बात से साबित होती है कि जब पांच या छह एजेंसियां ​​एक साझा उद्देश्य के साथ मिलकर काम करती हैं, तो देश किसी भी संकट का प्रभावी ढंग से सामना कर सकता है।

यह प्रक्रिया प्रधानमंत्री कार्यालय के स्पष्ट निर्णयों के साथ उच्चतम स्तर पर शुरू हुई। ऐसा ही एक निर्णय एलपीजी से संबंधित था, जिसमें ‘नागरिक सर्वोपरि’ का सिद्धांत सर्वोपरि था। सरकार ने यह निर्णय लिया कि घरेलू एलपीजी की कोई कमी नहीं होनी चाहिए, भले ही उद्योगों और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को कुछ असुविधा का सामना करना पड़े।

इससे पहले समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड के पूर्व चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर (एमडी) वर्तिका शुक्ला ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट के चलते पैदा हुई चुनौतियों ने भारत के ऊर्जा सेक्टर की ताकत को दिखाया है। इस दौरान भारत की आपूर्ति स्थिर रही और आपूर्ति श्रृंखला में आई रुकावटों का खुदरा कीमतों पर प्रभाव न्यूनतम रहा। इसकी वजह सरकार की ओर से समय पर आपूर्ति स्रोतों का विविधीकरण और एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर में पर्याप्त निवेश था।

हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के पूर्व चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर एम. के. सुराना ने कहा कि जब पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू हुआ और होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग में रुकावट आई, तो कई जानकारों को उम्मीद थी कि भारत को ईंधन की भारी कमी का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि वह आयातित कच्चे तेल पर बहुत अधिक निर्भर है।

–केसरिया न्यूज़

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