नई दिल्ली, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। नीति आयोग की सीईओ निधि छिब्बर ने कहा कि भारत में महिलाएं अब सिर्फ छोटे लोन ही नहीं ले रही हैं, बल्कि अब वह रिटेल और बिजनेस लैंडिंग के क्षेत्र में कदम रखकर देश के क्रेडिट मार्केट को सक्रिय रूप से बढ़ा रही हैं।
नीति आयोग की ओर से जारी एक नई रिपोर्ट में इस बात पर बल दिया गया है कि महिलाओं के औपचारिक क्रेडिट सिस्टम के साथ जुड़ने से बड़ा बदलाव आया है।
‘कर्जदारों से निर्माता तक: महिलाएं और भारत का बदलता क्रेडिट बाजार’ शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में दिखाया गया है कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और औपचारिक वित्तीय प्रणालियों के विस्तार से महिलाओं को लगातार ज्यादा फायदा मिल रहा है।
छिब्बर ने रिपोर्ट जारी होने पर कहा कि आर्थिक विकास तब बेहतर होता है जब ज्यादा लोग बाजारों में कुशलता से हिस्सा लेते हैं। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास तब आगे बढ़ता है जब बाजारों में भागीदारी ज्यादा व्यापक, गहरी और ज्यादा कुशल हो जाती है।
उन्होंने आगे कहा कि इस रिपोर्ट के नतीजे दिखाते हैं कि महिलाएं इन बदलावों को किस तरह से लगातार आकार दे रही हैं और उनसे फायदा उठा रही हैं।
निधि छिब्बर ने समझाया कि खास बात यह है कि महिला कर्जदार अब शुरुआती स्तर के क्रेडिट से आगे बढ़कर रिटेल और कारोबारी जरूरतों के लिए कर्ज लेने की तरफ बढ़ रही हैं, जो उनकी बढ़ती वित्तीय क्षमता और गहरे आर्थिक जुड़ाव का संकेत है।
रिपोर्ट से पता चला है कि भारत में महिला कर्जदारों के पास फिलहाल 76 लाख करोड़ रुपए का क्रेडिट पोर्टफोलियो है, जो कुल सिस्टम क्रेडिट का 26 फीसदी है। वर्ष 2017 के मुकाबले बड़ी बढ़ोत्तरी है। वर्ष 2017 में 16 लाख करोड़ रुपए की बढ़ोत्तरी हुई थी। इस दौरान कुल क्रेडिट एक्सपोजर 4.8 गुना बढ़ गया है।
क्रेडिट का सक्रिय रूप से इस्तेमाल करने वाली महिलाओं की संख्या में भी लगातार बढ़ोतरी हुई है, और 2017 से 2025 के बीच इसकी सालाना चक्रवृद्धि विकास दर 9 प्रतिशत रही है।
नीति आयोग के ‘महिला उद्यमिता मंच’ के तहत ट्रांसयूनियन सिबिल और माइक्रोसेव कंसल्टिंग के सहयोग से तैयार की गई इस रिपोर्ट में इस बात का विस्तृत ब्योरा दिया गया है कि क्रेडिट इकोसिस्टम के अंदर महिलाएं किस तरह से आगे बढ़ रही हैं।
इसमें बड़े पैमाने पर क्रेडिट ब्यूरो से मिले डेटा को ग्रामीण महिला उद्यमियों से मिली जानकारियों के साथ मिलाकर पेश किया गया है।
‘महिला उद्यमिता मंच’ की प्रमुख अन्ना रॉय ने कहा कि महिलाओं की ओर से क्रेडिट के इस्तेमाल का बढ़ता दायरा और विविधता भारत की अर्थव्यवस्था में एक सार्थक बदलाव का संकेत है।
–आईएएनएस
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