पाकिस्तान: क्वेटा में गहराया जल संकट, सिंध पर पानी का हिस्सा रोकने का आरोप


क्वेटा, 22 जुलाई (आईएएनएस)। पाकिस्तान का क्वेटा शहर इस समय पानी के गंभीर संकट से जूझ रहा है। स्थानीय मीडिया की बुधवार की रिपोर्ट के मुताबिक, शहर में भूजल का स्तर नीचे चला गया है और वॉटर एंड सैनिटेशन एजेंसी (डब्‍ल्‍यूएएसए) की तरफ से मिलने वाली सरकारी पानी की सप्लाई कई इलाकों में या तो पूरी तरह बंद हो गई है या बहुत कम कर दी गई है।

पाकिस्तान के प्रमुख अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की जानकारी के अनुसार, सरिएब, सिरकी रोड, समुंगली रोड, जिन्ना टाउन, कंबरनी रोड, सैटेलाइट टाउन, सब्जल रोड और खयाबन-ए-आगा जैसे इलाकों के लोग पानी की भारी कमी का सामना कर रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चे भी पानी लाने के लिए पैदल लंबी दूरी तय करने को मजबूर हैं।

क्वेटा के कई घरों में पिछले छह महीनों से नल का पानी नहीं आया है, जिससे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हो गई है। स्थानीय लोगों ने द एक्सप्रेस ट्रिब्यून से बातचीत में बताया कि वे नियमित रूप से डब्‍ल्‍यूएएसए के बिल भरते हैं, फिर भी उन्हें पानी नहीं मिल रहा। कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ और अधिकारियों की तरफ से सिर्फ भरोसा ही दिया जाता रहा।

18 जुलाई को पाकिस्तान के सिंध और बलूचिस्तान प्रांतों के बीच पानी को लेकर विवाद और बढ़ गया। बलूचिस्तान के तीन मंत्रियों ने सुक्कुर बैराज पर किसानों के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सिंध, बलूचिस्तान के हिस्से का पानी मोड़ रहा है। मंत्रियों ने कहा कि लंबे समय से पानी की कमी के कारण किसानों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

मंत्रियों ने सिंध सरकार से मांग की कि वह सिंध में बिना अनुमति बनाए गए रास्तों के जरिए बलूचिस्तान के हिस्से का पानी चोरी होने पर कार्रवाई करे। लरकाना डिवीजन के कई इलाकों के किसानों ने भी बलूचिस्तान के किसानों के साथ मिलकर पानी की कमी के खिलाफ प्रदर्शन किया।

बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने इस मुद्दे पर सिंध सरकार से बात करने के लिए एक समिति बनाई है। इस समिति में मंत्री मोहम्मद सादिक उमरानी, सलीम अहमद खोसो और मोहम्मद खान लेहरी शामिल हैं।

प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए मोहम्मद सादिक उमरानी ने कहा कि बलूचिस्तान को 1991 के जल समझौते के तहत मिलने वाला पानी पूरी तरह दिया जाना चाहिए। उनका कहना था कि प्रांत को खिरथर नहर से मिलने वाले 2,400 क्यूसेक और पट फीडर नहर से मिलने वाले 6,700 क्यूसेक पानी का पूरा हिस्सा नहीं मिल रहा है।

उमरानी ने कहा कि पानी की कमी की वजह से बलूचिस्तान के किसान फसल बोने के सबसे अहम समय पर सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। इससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे खेती पर गंभीर असर पड़ सकता है।

सलीम अहमद खोसो ने कहा कि सिंध सिंचाई विभाग के अधिकारियों का दावा है कि बलूचिस्तान को उसके हिस्से से ज्यादा पानी मिल रहा है, लेकिन समिति ने इस दावे को खारिज कर दिया। उनका कहना था कि जमीनी हालात साफ बताते हैं कि पानी की भारी कमी है। उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान इस समस्या का स्थायी समाधान चाहता है, ताकि हर साल इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन न करने पड़ें।

–आईएएनएस

एवाई/डीकेपी


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