नई दिल्ली, 13 मार्च (आईएएनएस)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को लोकसभा में कहा कि सरकार वित्त वर्ष 26 के लिए राजकोषीय घाटे को संशोधित अनुमानों के अनुरूप रखेगी।
संसद में सीतारमण ने कहा कि अतिरिक्त खर्च के प्रस्ताव के बाद भी राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 27 के बजट में घोषित किए गए संशोधित लक्ष्य के अनुरूप ही रहेगा। साथ ही उन्होंने दोहराया कि सरकार राजकोषीय अनुशासन और राजकोषीय समेकन को लेकर प्रतिबद्ध बनी हुई है।
वित्त मंत्री के मुताबिक, केंद्र सरकार द्वारा कोविड महामारी के बाद उठाए गए कदमों से देश की अर्थव्यवस्था मजबूती हुई है और साथ ही, वैश्विक झटकों के बाद भी राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने की देश की क्षमता भी बढ़ी है।
इसके अतिरिक्त, वित्त मंत्री ने इकोनॉमिक स्टेबलाइजेशन फंड का प्रस्ताव रखा, जो देश कों वैश्विक आर्थिक झटकों का मजबूती से सामना करने के लिए अतिरिक्त राजकोषीय क्षमता प्रदान करेगा।
सीतारमण ने कहा कि प्रस्तावित फंड अप्रत्याशित वैश्विक संकटों जैसे आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान, किसी बड़े संकट के चलते अर्थव्यवस्था के मुख्य क्षेत्रों को होने वाले नुकसान और अन्य बाहरी झटकों से निपटने के लिए सरकार की राजकोषीय हेडरूम प्रदान करेगा।
इस फंड का उद्देश्य हाल के अंतरराष्ट्रीय संकटों जैसी वैश्विक अनिश्चितता की अवधि के दौरान अर्थव्यवस्था को स्थिर करने में मदद करना है।
इस फंड को लेकर वित्त मंत्री ने कहा कि अप्रत्याशित घटनाक्रमों की आशंका में सरकार द्वारा आर्थिक स्थिरीकरण के उपाय तैयार किए जा रहे हैं।
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध पर वित्त मंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव भारत के लिए चुनौतियां पैदा कर रहा है। साथ ही कहा कि सरकार इन परिस्थितियों से निपटने के लिए लगातार कदम उठा रही है।
सीतारामण ने आगे कहा कि सरकार आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और एलपीजी सहित ऊर्जा आपूर्ति से संबंधित संभावित चुनौतियों जैसे मुद्दों से निपटने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा कि भारत का मजबूत व्यापक आर्थिक ढांचा देश को राजकोषीय स्थिरता से समझौता किए बिना बाहरी झटकों का सामना करने में सक्षम बनाता है।
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