Tuesday, January 27, 2026

विक्रम भट्ट मतलब सस्पेंस, रोमांच और रोमांस… अनकही दुनिया से जुड़े फिल्मों के 'बादशाह'


नई दिल्ली, 26 जनवरी (आईएएनएस)। सस्पेंस, रोमांच और रोमांस… तीनों का तड़का अगर कोई फिल्मों में ऐसे लगाता है कि दर्शक सीट से हिलें ही नहीं, तो वो हैं विक्रम भट्ट। ये वो डायरेक्टर हैं जिनकी फिल्मों में कहानी बस कहानी नहीं रहती, बल्कि एक ऐसी दुनिया में खींच लेती है, जहां आप खुद को खो देते हो। भट्ट की खासियत ये है कि वो डर और प्यार को इस तरह जोड़ते हैं कि आप कभी हंसते हैं, तो कभी डर के मारे कांपते हैं।

विक्रम भट्ट का जन्म 27 जनवरी 1969 को मुंबई में हुआ। उनके परिवार का फिल्म इंडस्ट्री से गहरा नाता रहा है। उनके दादा, विजय भट्ट, 50-60 के दशक के बड़े फिल्म निर्माता और डायरेक्टर थे। विजय भट्ट ने उस जमाने में कई हिट फिल्में दीं और फिल्म इंडस्ट्री में उनका नाम बहुत बड़ा था। वहीं, विक्रम के पिता, प्रवीण भट्ट, एक जाने-माने सिनेमैटोग्राफर हैं।

विक्रम भट्ट ने अपने करियर की शुरुआत 1992 में फिल्म ‘जानम’ से की थी। उस वक्त उन्होंने रोमांटिक और कॉमेडी फिल्मों पर ध्यान दिया। उनकी शुरुआती फिल्में जैसे ‘मदहोश’, ‘गुनहगार’ और ‘फरेब’ ने दर्शकों को भले ही पसंद आई हों, लेकिन विक्रम भट्ट को पहचान हॉरर फिल्मों के बाद ही मिली।

असल में, 2002 में उन्होंने राज फिल्म्स के साथ हॉरर जॉनर में कदम रखा। पहली हॉरर फिल्म इतनी सफल रही कि उन्होंने महसूस किया कि हॉरर फिल्मों में कुछ नया करने का मजा अलग ही है। इसके बाद तो उन्होंने हॉरर फिल्मों की एक लंबी लिस्ट तैयार कर दी।

विक्रम भट्ट ने हॉरर जॉनर में कई नए ट्रेंड सेट किए। उनकी हिट हॉरर फिल्मों में ‘1920’, ‘शापित’, ‘हॉन्टेड 3डी’, ‘राज 3’, ‘क्रिचर 3डी’, ‘राज रिबूट’, ‘1921’, ‘घोस्ट’ और ‘हैक्ड’ जैसी फिल्में शामिल हैं। इन फिल्मों में उन्होंने सिर्फ डर पैदा करना ही नहीं बल्कि कहानी और स्क्रीनप्ले के जरिए दर्शकों को पूरी तरह बांधने की कोशिश की। उनकी हॉरर फिल्में सिर्फ चौंकाने वाली नहीं होतीं, बल्कि कहानी में ट्विस्ट और रोमांच भी भरपूर होता है।

विक्रम भट्ट की फिल्मों में सस्पेंस और रहस्य की परतें इतनी गहरी होती हैं कि आप खुद ही कहानी में घुस जाते हैं। उन्होंने हॉरर फिल्मों को सिर्फ डराने वाली फिल्म तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसमें इमोशन, रोमांस और थ्रिल का भी तड़का लगाया। इस वजह से उनकी हॉरर फिल्मों का अलग ही क्रेज बन गया है।

–आईएएनएस

पीआईएम/एबीएम


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