अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप एआई की सुन रहे? राम गोपाल वर्मा ने उठाए सवाल, विरोधाभासी बयानों पर जताई चिंता


मुंबई, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। फिल्म निर्माता-निर्देशक राम गोपाल वर्मा सोशल मीडिया पर अक्सर एक्टिव रहते हैं। वह फिल्म से जुड़े अपडेट हों या देश का कोई मुद्दा अक्सर खुलकर अपनी राय रखते नजर आते हैं। सोमवार को किए पोस्ट में राम गोपाल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विरोधाभासी बयानों पर चिंता जताते हुए सवाल किया कि क्या वह केवल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सलाह पर काम कर रहे हैं?

राम गोपाल वर्मा ने पोस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की विदेश नीति और उनके बयानों में लगातार बदलाव पर सवाल उठाया है। उन्होंने पूछा,” क्या ट्रंप सिर्फ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की सलाह सुन रहे हैं?”

उन्होंने लिखा कि ट्रंप एक पल में कहते हैं कि “बड़े पैमाने पर लड़ाई खत्म हो गई है”, तो दूसरे पल में “एक छोटी-सी मुहिम” जो अब खत्म होने वाली है। फिर वे पावर प्लांट और पुलों पर हमले की धमकी देते हुए कहते हैं कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य तुरंत नहीं खोला गया तो ईरान को पाषाण युग में वापस भेज देंगे। इसके कुछ देर बाद वह अचानक “सार्थक बातचीत” की बात करने लगते हैं और दावा करते हैं कि ईरान में “सत्ता परिवर्तन” पहले ही हो चुका है।”

वर्मा ने सवाल किया कि किस तरह की भरोसेमंद मानवीय जानकारी हर कुछ घंटों में ओवल ऑफिस पहुंच सकती है जो इन विरोधाभासों को सही ठहरा सके? खासकर तब जब ट्रंप अधिकारियों की बात न मानने, विरोधियों को निकालने और सलाहकारों पर भरोसा न करने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कहा कि पारंपरिक ब्रीफिंग, सैटेलाइट फीड या कैबिनेट की चर्चाएं इंसानी गति से चलती हैं। इनमें युद्ध के लक्ष्य, आर्थिक प्रभाव, ईरान की संभावित जवाबी कार्रवाई या घरेलू राजनीति पर पड़ने वाले असर को तुरंत नहीं बदला जा सकता। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लाइव डेटा को तेजी से विश्लेषित कर सकता है। यह युद्ध की जानकारी, लोगों की भावनाएं, तेल की कीमतें, सहयोगी देशों की प्रतिक्रियाएं आदि को देखते हुए “क्या होगा अगर” वाले हजारों परिदृश्य तैयार कर सकता है।

उन्होंने लिखा कि एआई कोई अहंकार नहीं रखता, न देरी करता है और न विरोध। यह ट्रंप की सोच के अनुरूप सटीक विकल्प दे सकता है। ये अचानक बदलाव ठीक वैसे ही लगते हैं जैसे कोई एआई को-पायलट काम करता हो। हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर यूजर खुद ट्रंप जितना ही कम ध्यान रखने वाला हो तो इतने सारे विकल्पों में उलझ सकता है।

पोस्ट के अंत में वर्मा ने एक अलग मुद्दे पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि माता-पिता और शिक्षक बच्चों को गाली-गलौज और अश्लील शब्दों से दूर रखने की कोशिश करते हैं ताकि वे बड़े होकर सम्मानजनक इंसान बनें। लेकिन अगर अमेरिका के राष्ट्रपति खुद सार्वजनिक रूप से अश्लील और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हैं तो माता-पिता अपने बच्चों को क्या समझाएंगे?

–आईएएनएस

एमटी/एएस


Related Articles

Latest News