नई दिल्ली, 15 जून (केसरिया न्यूज़)। भारत के शहरी इलाकों में 15 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए कुल बेरोजगारी दर मई 2026 में घटकर 6.4 प्रतिशत रह गई है, जो पिछले साल इसी महीने में 6.9 प्रतिशत थी। साथ ही, इस दौरान शहरी इलाकों में महिलाओं की बेरोजगारी दर भी घटकर 8.2 प्रतिशत के निचले स्तर पर आ गई। यह जानकारी सोमवार को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ओर से जारी डेटा में दी गई।
आधिकारिक बयान में कहा गया कि समग्र स्तर पर बेरोजगारी दर में कोई बदलाव नहीं हुआ है और ग्रामीण बेरोजगारी दर भी 5.1 प्रतिशत पर स्थिर बनी हुई है।
कुल श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) मई में 54.4 प्रतिशत दर्ज की गई है यह पिछले साल इसी महीने में 54.8 प्रतिशत थी, यानी इसमें कोई खास बदलाव नहीं हुआ।
इसी तरह, कुल कामगारों की भागीदारी दर (डब्ल्यूपीआर) इस महीने 51.4 प्रतिशत पर स्थिर रही, जबकि पिछले साल मई में यह 51.7 प्रतिशत थी। एनएसओ द्वारा किया जाने वाला ‘आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण’ (पीएलएफएस), आबादी की गतिविधियों में भागीदारी और रोजगार व बेरोजगारी की स्थितियों से जुड़े डेटा का मुख्य स्रोत है।
एनएसओ ने देश के लिए श्रम बल संकेतकों के मासिक और तिमाही अनुमान उपलब्ध कराने के लिए जनवरी 2025 से पीएलएफएस सर्वे की कार्यप्रणाली में बदलाव किया गया है।
सांख्यिकी मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, चालू वर्ष की जनवरी-मार्च तिमाही के दौरान शहरी बेरोजगारी में कमी आई, जबकि ग्रामीण रोजगार में द्वितीयक और तृतीयक दोनों क्षेत्रों में बढ़ोतरी हुई।
15 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए शहरी इलाकों में कुल बेरोजगारी दर में गिरावट का रुझान दिखा; जनवरी-मार्च तिमाही में यह 6.6 प्रतिशत रही, जबकि पिछली तिमाही में यह 6.7 प्रतिशत थी।
पीएलएफएस के नतीजे हर महीने बुलेटिन के रूप में जारी किए जाते हैं। इसमें लेबर मार्केट के मुख्य इंडिकेटर्स के अनुमान दिए जाते हैं, जिनमें ‘करंट वीकली स्टेटस’ (सीडब्ल्यूएस) अप्रोच के आधार पर पूरे देश के स्तर पर एलएफपीआर, डब्ल्यूपीआर और बेरोजगारी दर शामिल हैं।
–केसरिया न्यूज़
