उत्तर प्रदेश में बढ़ती गर्मी के साथ बिजली की मांग ने इस बार समय से पहले ही नए रिकॉर्ड बनाने शुरू कर दिए हैं। राज्य की बिजली मांग 27,000 मेगावाट का आंकड़ा पार कर गई, जो सामान्यतः मई-जून में देखने को मिलती है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि इस बार गर्मी का मौसम लंबा और ज्यादा तीव्र हो सकता है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 10 अप्रैल को जहां बिजली मांग 21,618 मेगावाट थी, वहीं मंगलवार रात 10:22 बजे यह बढ़कर 27,272 मेगावाट तक पहुंच गई। विशेषज्ञों का मानना है कि अप्रैल में ही इतनी अधिक मांग होना असामान्य है और यह आने वाले महीनों में और दबाव बढ़ने का संकेत है। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) के अधिकारियों के अनुसार, मई-जून में बिजली की मांग 33,000 मेगावाट से अधिक जा सकती है। यदि मानसून कमजोर रहता है, तो अगस्त-सितंबर में भी मांग में दोबारा उछाल देखने को मिल सकता है।
वर्ष 2025 में प्रदेश की अधिकतम मांग 32,068 मेगावाट दर्ज की गई थी, जो देश में सबसे अधिक थी। हालांकि, बढ़ती मांग के बावजूद यूपीपीसीएल का दावा है कि फिलहाल बिजली की आपूर्ति में कोई कमी नहीं है। विभाग के अनुसार, लगभग 34,000 मेगावाट बिजली उपलब्ध रखने की योजना बनाई गई है। कुल मांग का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौतों से पूरा किया जाएगा, जबकि शेष बिजली इंडियन एनर्जी एक्सचेंज, पावर एक्सचेंज इंडिया लिमिटेड और हिंदुस्तान पावर एक्सचेंज से खरीदी जाएगी। इसके अलावा अन्य राज्यों के साथ 4,663 मिलियन यूनिट की बैंकिंग व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।
मंगलवार को हुई उच्चस्तरीय बैठक में ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव एवं यूपीपीसीएल अध्यक्ष आशीष कुमार गोयल ने सभी डिस्कॉम को अलर्ट रहने के निर्देश दिए। उन्होंने ट्रांसफॉर्मर और लाइनों के रखरखाव में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी देते हुए निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने को कहा। आने वाले हफ्तों में यह साफ हो जाएगा कि यूपीपीसीएल की तैयारियां बढ़ती मांग और कमजोर वितरण नेटवर्क के दोहरे दबाव को कितनी प्रभावी ढंग से संभाल पाती हैं।
