Tuesday, January 27, 2026

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने रानी मुखर्जी को अवॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस-वंदे मातरम पुरस्कार से नवाजा, एक्ट्रेस ने जताया आभार


मुंबई, 26 जनवरी (आईएएनएस)। अभिनेत्री रानी मुखर्जी की फिल्म ‘मर्दानी 3’ जल्द ही सिनेमाघरों में दस्तक देने वाली है। इससे पहले भारतीय सिनेमा में उनके शानदार योगदान के लिए पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सी. वी. आनंद बोस ने रानी मुखर्जी को अवॉर्ड ऑफ एक्सीलेंस-वंदे मातरम पुरस्कार से सम्मानित किया है।

इस खास मौके पर रानी मुखर्जी ने बहुत भावुक होकर अपना आभार जताया। उन्होंने कहा, “आज मेरा दिल उन भावनाओं से भरा है, जिन्हें शब्दों में बयां करना मुश्किल है। सिनेमा में अपने 30वें साल में यह पुरस्कार मिलना मेरे लिए बहुत बड़ी बात है। यह सिर्फ मेरे काम की तारीफ नहीं, बल्कि मेरे जड़ों से जुड़ा एक गर्मजोशी भरा स्वागत जैसा है। मुझे उम्मीद है कि मैंने पश्चिम बंगाल को गर्व महसूस कराया होगा और आगे भी ऐसा करती रहूंगी।”

रानी ने बताया कि उनका पूरा करियर ज्यादातर हिंदी फिल्मों में बीता है, लेकिन उनकी जड़ें हमेशा बंगाली रही हैं। उन्होंने कहा, “मेरी जड़ें मेरे मूल्यों, अनुशासन, कला और साहित्य के प्रति प्यार में साफ दिखती हैं। मैं जीवन को लचीलेपन, गर्मजोशी और शांत ताकत के साथ देखती हूं, जो बंगाली संस्कृति से आया है।”

अभिनेत्री ने अपने परिवार का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, “मैं एक ऐसे घर में पली-बढ़ी, जहां संस्कृति को जीने का हिस्सा माना जाता था। संगीत, सिनेमा, कहानियां और बौद्धिक बातचीत रोज की जिंदगी का हिस्सा थीं। इस सबके केंद्र में मेरी मां थीं। मेरे माता-पिता, जो गर्व से बंगाली थे, ने मुझे सिखाया कि असली ताकत जोर-जबरदस्ती में नहीं होती। उन्होंने शालीनता, आत्म-सम्मान और गरिमा के साथ अपनी बात पर अडिग रहना सिखाया।”

रानी ने अपने करियर की हिम्मत का श्रेय भी माता-पिता को दिया। उन्होंने कहा, “जो भी साहस मैंने फिल्मों में दिखाया या फैसले लिए, वह मेरे माता-पिता को ईमानदारी से जीवन जीते देखकर आया। यह सम्मान उतना मेरा है, जितना उनका। काश मेरी मां आज यहां होती। मुझे दुख है कि मैं समारोह में नहीं जा पाई, लेकिन इस बड़े सम्मान के लिए मैं दिल से धन्यवाद देती हूं।”

अभिनेत्री ने आखिरी में बंगाल की महान परंपरा का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “बंगाल हमेशा विचारकों, कवियों, विद्रोहियों और कलाकारों की भूमि रही है। रविंद्रनाथ टैगोर से लेकर सत्यजीत रे तक, इस मिट्टी ने भारत को ऐसे लोग दिए जिन्होंने सोचने और महसूस करने का तरीका बदल दिया। इस भूमि से पहचान मिलना मेरे लिए बहुत बड़ा सौभाग्य है। मैं इस पुरस्कार को बहुत विनम्रता, गर्व और नई जिम्मेदारी के साथ स्वीकार करती हूं। मैं भारतीय सिनेमा में ईमानदारी से काम जारी रखूंगी और बंगाल के उन मूल्यों के लायक बनी रहूंगी जो मुझे मिले हैं।”

रानी ने आखिर में कहा, “पश्चिम बंगाल, मुझे अपना मानने और इतना प्यार देने के लिए धन्यवाद। यह मेरे लिए अनमोल है। वंदे मातरम।”

–आईएएनएस

एनएस/वीसी


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