जमानत मामलों में देरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सभी हाईकोर्ट को दिए नए निर्देश

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नई दिल्ली, 11 मई (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के हाईकोर्ट में लंबित जमानत मामलों को लेकर अहम निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने साफ कहा है कि जमानत से जुड़े मामलों की सुनवाई में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए और इसके लिए एक तय सिस्टम बनाया जाना जरूरी है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने सोमवार को सभी हाईकोर्ट को निर्देश दिए हैं कि जमानत याचिकाओं की सुनवाई तेजी से और नियमित तरीके से हो। जमानत के मामलों को हर हफ्ते या कम से कम दो हफ्ते में एक बार जरूर लिस्ट किया जाए। इसके लिए ऑटोमेटिक लिस्टिंग सिस्टम तैयार करने को कहा गया है ताकि किसी केस की सुनवाई सिर्फ तारीख पर तारीख तक सीमित न रह जाए।

कोर्ट ने यह भी कहा कि जमानत याचिका की पहली सुनवाई से पहले ही राज्य सरकार या जांच एजेंसी को अपनी स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। इससे कोर्ट को मामले की स्थिति समझने में आसानी होगी और सुनवाई जल्दी आगे बढ़ सकेगी। साथ ही, जमानत याचिका दाखिल करने वाले वकील को उसकी कॉपी एडवोकेट जनरल या संबंधित एजेंसी को पहले से देनी होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्ट से कहा कि नई जमानत याचिकाओं को हर दूसरे दिन या ज्यादा से ज्यादा एक हफ्ते के भीतर सुनवाई के लिए लिस्ट किया जाए। इसके अलावा एडमिशन स्टेज पर नोटिस जारी करने की पुरानी प्रक्रिया खत्म करने की बात भी कही गई है क्योंकि इससे मामलों में देरी होती है।

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि जिन जमानत याचिकाओं पर सुनवाई नहीं हो पाती, उन्हें अपने आप दोबारा लिस्ट किया जाए। किसी केस को लंबे समय तक बिना सुनवाई के लंबित नहीं रखा जाना चाहिए। सभी हाईकोर्ट को मामलों के निपटारे के लिए एक तय टाइमलाइन भी बनानी होगी। कोर्ट ने फोरेंसिक साइंस लैब रिपोर्ट में होने वाली देरी पर भी चिंता जताई।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पीड़ितों से जुड़े मामलों में जांच अधिकारियों को ज्यादा जिम्मेदारी से काम करना होगा। अगर जांच में ढिलाई बरती गई तो इसका फायदा आरोपी को जमानत मिलने के रूप में मिल सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट, जांच एजेंसियां और सरकारें मिलकर ऐसा सिस्टम बनाएं जिससे पीड़ितों के अधिकार भी सुरक्षित रहें और जमानत मामलों का समय पर निपटारा भी हो सके।

–आईएएनएस

पीआईएम/पीएम

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