बंगाल में चुनाव के बाद केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार

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नई दिल्ली, 4 मई (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल से जुड़ी एक याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई, जिसमें चुनाव परिणामों के बाद संभावित हिंसा को रोकने के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की मांग की गई थी, लेकिन अदालत ने इस याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ता को पहले कलकत्ता हाईकोर्ट जाने की सलाह दी।

यह मामला चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने आया। याचिका सनातन संस्था की ओर से दाखिल की गई थी। संस्था की तरफ से वरिष्ठ वकील वी. गिरि ने दलील दी कि 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद राज्य में काफी हिंसा देखने को मिली थी और इस बार भी चुनाव परिणामों के बाद वैसी ही स्थिति बनने की आशंका है। इसी वजह से पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और केंद्रीय बलों की तैनाती जरूरी है।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट से यह भी अनुरोध किया कि पूरे हालात पर नजर रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति बनाई जाए, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी या हिंसा को समय रहते रोका जा सके।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट की पीठ इस दलील से सहमत नहीं दिखी। अदालत ने साफ कहा कि इस तरह के मामलों में पहले संबंधित हाईकोर्ट का रुख करना चाहिए, क्योंकि वही इस स्तर पर अधिक उपयुक्त मंच है। इसलिए कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कलकत्ता हाईकोर्ट जाने को कहा।

सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से भी दलील दी गई। आयोग की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दामा शेषाद्रि नायडू ने कहा कि मतदान और मतगणना की प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव आयोग की भूमिका खत्म हो जाती है, इसलिए कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है।

इस पर अदालत ने भी स्पष्ट टिप्पणी की। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि इस मामले में निर्णय राज्य की राजनीतिक कार्यपालिका को लेना होता है। वहीं चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि उम्मीद है कि राज्य सरकार यह समझेगी कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है।

याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर पहले से ही मुख्य याचिका दाखिल कर रखी है और अभी जो मांग की गई थी वह एक अंतरिम आवेदन के जरिए थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट अपने रुख पर कायम रहा और तुरंत राहत देने से इनकार कर दिया।

अदालत ने कहा कि इस मामले की मुख्य याचिका 11 मई को सूचीबद्ध है और उसी दिन इस पर विस्तृत सुनवाई की जाएगी। अभी के लिए अदालत ने किसी भी तरह का हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

–आईएएनएस

पीआईएम/वीसी

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